परिसीमन बिल पर बदल रहा DMK का रुख, सरकार को मिल सकता है अहम समर्थन; लोकसभा में बढ़ेगी सियासी हलचल

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के परिसीमन विधेयक को लेकर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रमुक के रुख में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। चुनाव से पहले इस बिल का विरोध करने वाली द्रमुक अब कह रही है कि विधेयक के प्रावधान सामने आने के बाद ही समर्थन या विरोध पर फैसला लिया जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि विधेयक में राज्यों की विधानसभा सीटों में समान अनुपात से बढ़ोतरी का प्रावधान शामिल होता है तो द्रमुक सरकार के पक्ष में खड़ी हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, द्रमुक का नया रुख इस बात का संकेत है कि पार्टी अब सीधे विरोध के बजाय विधेयक के प्रावधानों की समीक्षा के बाद निर्णय लेने की रणनीति अपना रही है।
सीटों में 50 फीसदी बढ़ोतरी के प्रावधान पर नजर
सूत्रों का कहना है कि यदि परिसीमन विधेयक में राज्यों की मौजूदा विधानसभा सीटों की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान रखा जाता है तो द्रमुक इसके समर्थन पर विचार कर सकती है।
इससे पहले अप्रैल में सरकार की ओर से पेश किए गए विधेयक को लेकर ऐसी चर्चा हुई थी, लेकिन अंतिम विधेयक में यह प्रावधान शामिल नहीं था। इसके कारण वह विधेयक पारित नहीं हो सका था।
पहले खुलकर विरोध कर रही थी द्रमुक
जब केंद्र सरकार पिछले सत्र में परिसीमन विधेयक लेकर आई थी, तब द्रमुक ने इसका जोरदार विरोध किया था। पार्टी ने इसे तमिलनाडु के हितों के खिलाफ बताते हुए विपक्षी गठबंधन के साथ मिलकर विरोध किया था।
द्रमुक के वरिष्ठ नेता त्रिरुचि शिवा ने कहा कि पहले वाला रुख अब नहीं है। उन्होंने कहा कि अब पार्टी पहले विधेयक का प्रारूप देखेगी और उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।
लोकसभा में द्रमुक के 22 सांसद अहम
परिसीमन विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। मौजूदा स्थिति में एनडीए के पास करीब 326 सांसद हैं, जबकि विधेयक पारित कराने के लिए 360 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता बताई जा रही है।
ऐसे में लोकसभा में द्रमुक के 22 सांसदों का समर्थन सरकार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद सत्ता पक्ष की नजर द्रमुक के रुख पर भी बनी हुई है।
विशेष सत्र की चर्चा पर सरकार ने दिया जवाब
परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर संसद के विशेष सत्र बुलाए जाने की चर्चाओं पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि 16 से 18 अगस्त के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
सरकार मौजूदा मानसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने की कोशिश कर रही है। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करना बताया जा रहा है।
परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर बढ़ी सियासी नजर
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि स्वतंत्रता दिवस के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाकर इन विधेयकों को दोबारा पेश किया जा सकता है। हालांकि सरकार ने फिलहाल ऐसी किसी योजना से इनकार किया है। अब सभी की नजर परिसीमन विधेयक के अंतिम प्रारूप और द्रमुक के फैसले पर टिकी हुई है।



