सोना-चांदी सहित 64 दिव्य औषधियों का शोधन कर बनाते हैं: पारद शिवलिंग

बरेली। यूं तो पारे की अपनी तासीर होती है कि वह ठहरता ही नही है लेकिन मांगरोल के प्रसिद्ध आश्रम में सोना-चांदी सहित चौंसठ दिव्य औषधियों के मिश्रण के बाद शोधन से यहां दुर्लभ पारद शिवलिंग तैयार किए जाते है।
देश के कई शहरों से श्रद्धालु यहां पारे के शिवलिंग लेने के लिए पहुंचते है। ब्रम्हलीन बापोली वाले गुरूजी खुद पारद शिवलिंग बनाते थे उन्होंने अपने शिष्य ब्रह्मचारी महाराज को यह विद्या सिखाकर मांगरोल आश्रम में इसकी शुरूआत कराई थी।
ब्रम्हचारी जी द्वारा वर्षो से वैदिक क्रिया के साथ इसका निर्माण किया जा रहा है। हैदराबाद, जयपुर, केदारनाथ,धौलपुर, नागपुर, मुम्बई, वृंदावन, ऋषिकेष, कोल्हापुर, रामेश्वरम, पुरी, दिल्ली सहित कई बड़े शहरों से श्रद्धालु शिवलिंग लेने यहां आते है। 5 हजार से लेकर लाखों रूपए तक के शिवलिंग सोना-चांदी सहित 64 औषधियों की मात्रा के अनुसार तैयार होते है।
सरल नही है निर्माण



