हथकड़ी में ‘स्टाइल’ और कोर्ट कैंपस रील: चंदन मिश्रा हत्याकांड में सोशल मीडिया एक्टिविटी से सनसनी

पटना में चर्चित चंदन मिश्रा हत्याकांड अब नए डिजिटल एंगल के कारण सुर्खियों में है। मामले के कथित शूटर से जुड़े नाम वाले सोशल मीडिया अकाउंट से लगातार पोस्ट और रील अपलोड होने के दावे सामने आए हैं। इनमें से तीन वीडियो कथित तौर पर पटना सिविल कोर्ट परिसर के बताए जा रहे हैं, जहां आरोपी हथकड़ी में कैमरे के सामने बेखौफ अंदाज में दिखाई देता है। वीडियो के बैकग्राउंड में चला देव गोली गाना चल रहा है, जिससे मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
जेल में बंद आरोपी के नाम से ऑनलाइन एक्टिविटी पर सवाल
जानकारी के मुताबिक आरोपी जेल में बंद है, फिर भी उसके नाम से सोशल मीडिया गतिविधियां जारी रहने की बात सामने आई है। 17 जुलाई को हुए हत्याकांड के बाद उसकी प्रोफाइल पर कई पोस्ट दिखाई दिए हैं, जबकि 24 दिसंबर और 3 फरवरी को भी अपडेट की चर्चा है। जांच एजेंसियां अब इस बात की तह तक जाने में जुटी हैं कि अकाउंट जेल के अंदर से ऑपरेट हो रहा है या बाहर से कोई इसे चला रहा है।
डिजिटल ‘दबंग’ इमेज बनाने की कोशिश?
पोस्ट और रील में खुद को ‘बिहार का बाहुबली’ बताने जैसी प्रस्तुति ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अपराध के गंभीर आरोपों के बीच सोशल मीडिया पर दबंग छवि गढ़ने की कोशिश साफ झलक रही है। कोर्ट परिसर जैसे संवेदनशील इलाके में वीडियो रिकॉर्ड होना सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न माना जा रहा है।
डिजिटल ट्रेल खंगाल रही पुलिस
सूत्रों के अनुसार पुलिस अब तकनीकी जांच में जुट गई है। आईडी किस डिवाइस से लॉगिन हुई, वीडियो किस लोकेशन से अपलोड हुए और अकाउंट तक किसकी पहुंच है—इन सभी बिंदुओं की पड़ताल की जा रही है। साथ ही जेल प्रशासन से भी रिपोर्ट मांगी गई है। यदि संचालन जेल के भीतर से साबित हुआ तो इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना जाएगा।
खौफ के साथ ‘फॉलोअर्स’ की चाह का नया ट्रेंड
विशेषज्ञों का मानना है कि अब कई अपराधी सिर्फ इलाके में डर कायम करने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी प्रभाव बनाने की रणनीति अपनाते हैं। दबंग छवि के जरिए सोशल मीडिया पर पहचान बनाने की यह प्रवृत्ति कानून व्यवस्था के लिए नई चुनौती बनती जा रही है। जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा कि यह महज दिखावा था या किसी बड़े नेटवर्क की सुनियोजित रणनीति।



