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घर खरीदना होगा आसान! 20 लाख तक की डील में नहीं लगेगा PAN कार्ड

नई दिल्ली : घर खरीदने का सपना देखने वाले लोगों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आ सकती है. इनकम टैक्स विभाग ने नए प्रस्तावित इनकम टैक्स फ्रेमवर्क के तहत ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनमें प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री से जुड़े PAN नियमों में बदलाव का सुझाव दिया गया है. अगर ये नियम अंतिम रूप से लागू हो जाते हैं, तो कम कीमत की संपत्ति खरीदने वालों के लिए प्रक्रिया पहले से आसान हो सकती है.

फिलहाल नियम यह है कि यदि कोई व्यक्ति 10 लाख रुपये से ज्यादा की अचल संपत्ति जैसे घर या प्लॉट, खरीदता या बेचता है, तो उसे अपना पैन नंबर देना अनिवार्य होता है. यानी 10 लाख से ऊपर की हर डील में PAN की जानकारी दर्ज करनी पड़ती है. लेकिन नए ड्राफ्ट नियमों में इस सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है. इसका मतलब यह होगा कि यदि प्रॉपर्टी की कीमत 20 लाख रुपये से कम है तो उस लेनदेन में PAN बताना जरूरी नहीं रहेगा.

यह बदलाव खासकर छोटे शहरों और कस्बों के खरीदारों के लिए राहत लेकर आ सकता है, जहां अब भी 20 लाख रुपये के भीतर घर या जमीन मिल जाती है. ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को कागजी प्रक्रिया कम झेलनी पड़ेगी और छोटे ट्रांजेक्शन अपेक्षाकृत आसान हो सकते हैं. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह अभी सिर्फ ड्राफ्ट नियम हैं. सरकार ने इन्हें सुझाव के रूप में जारी किया है और अंतिम फैसला फीडबैक लेने के बाद ही किया जाएगा. उम्मीद की जा रही है कि अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ तो ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकते हैं.

सिर्फ सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव ही नहीं है, बल्कि कुछ और अहम बदलावों की भी बात की गई है. उदाहरण के तौर पर, यदि किसी को गिफ्ट के रूप में प्रॉपर्टी मिलती है या जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट के तहत जमीन या फ्लैट का ट्रांसफर होता है, तो ऐसे मामलों को भी PAN अनुपालन के दायरे में लाने का सुझाव है, बशर्ते उनकी वैल्यू तय सीमा से ज्यादा हो. इसका मकसद बड़े और जटिल सौदों पर निगरानी बनाए रखना है, जबकि छोटे सौदों को राहत देना है.

टैक्स एक्सपर्ट का मानना है कि यह बदलाव संपत्ति की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखकर सुझाया गया है. पिछले कुछ वर्षों में रियल एस्टेट की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है. ऐसे में 10 लाख रुपये की सीमा कई जगहों पर अब बहुत छोटी मानी जाती है. प्रस्तावित 20 लाख की सीमा मौजूदा बाजार स्थितियों के ज्यादा करीब समझी जा रही है.

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