स्तम्भ

सत्ता से दूरी, कारोबार से नजदीकी… क्यों राजनीति से अलग रहे मुलायम सिंह के बेटे प्रतीक यादव?

लखनऊ: Prateek Yadav अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके जाने के बाद एक सवाल फिर चर्चा में है कि आखिर समाजवादी राजनीति के सबसे बड़े परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद उन्होंने कभी सत्ता की राह क्यों नहीं चुनी।

Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे और Aparna Yadav के पति प्रतीक यादव ने हमेशा खुद को राजनीति की चमक-दमक से दूर रखा। जहां यादव परिवार के कई सदस्य सक्रिय राजनीति में रहे, वहीं प्रतीक ने बिजनेस, फिटनेस और निजी जीवन को ही अपनी दुनिया बनाया।

सियासी विरासत से बनाई दूरी

राजनीतिक परिवार में जन्म लेने के बावजूद प्रतीक यादव ने कभी चुनावी राजनीति में दिलचस्पी नहीं दिखाई। माना जाता है कि लोकसभा या विधानसभा चुनाव लड़ना उनके लिए मुश्किल नहीं था, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से कभी राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं जताई।

करीबी लोगों के मुताबिक, वह शुरू से ही कारोबार को आगे बढ़ाने और अपनी अलग पहचान बनाने पर फोकस करना चाहते थे। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही उन्होंने दोस्तों से साफ कर दिया था कि उनका सपना एक सफल कारोरी बनने का है, न कि नेता बनने का।

जिम, फिटनेस और बिजनेस में थी खास दिलचस्पी

प्रतीक यादव फिटनेस को लेकर काफी गंभीर रहते थे। जिम और हेल्थ रूटीन उनकी लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा था। राजनीति के मंचों और रैलियों से दूर वह ज्यादातर अपने बिजनेस और परिवार के साथ समय बिताते थे।

परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि उन्हें जानवरों, खासकर कुत्तों से बेहद लगाव था। यही वजह थी कि वह चमड़े से बने उत्पादों के इस्तेमाल से भी परहेज करते थे।

मृदुभाषी और लो-प्रोफाइल रहने वाले शख्स

प्रतीक यादव को बेहद शांत और मृदुभाषी स्वभाव का माना जाता था। उन्होंने कभी सार्वजनिक मंचों पर परिवार के भीतर की राजनीति या विवादों पर बयानबाजी नहीं की।

बताया जाता है कि Mulayam Singh Yadav और उनकी मां साधना गुप्ता के निधन के बाद सोशल मीडिया पर हुए कुछ व्यक्तिगत हमलों से वह काफी आहत हुए थे। इसके बाद उन्होंने खुद को और ज्यादा लो-प्रोफाइल कर लिया था।

परिवार में संतुलन बनाए रखा

हालांकि Akhilesh Yadav और प्रतीक यादव अलग-अलग मांओं के बेटे थे, लेकिन दोनों के रिश्तों में सार्वजनिक तौर पर हमेशा मर्यादा और सम्मान दिखाई दिया। परिवार के भीतर तमाम राजनीतिक उठापटक के बावजूद प्रतीक ने कभी खुलकर किसी खेमे का हिस्सा बनने की कोशिश नहीं की।

अब कई सवाल हमेशा के लिए अधूरे

प्रतीक यादव के निधन के साथ ही यादव परिवार की आंतरिक राजनीति, सत्ता से उनकी दूरी और परिवार के पावर स्ट्रक्चर में उनकी भूमिका से जुड़े कई सवाल भी हमेशा के लिए अनुत्तरित रह गए हैं।

उनकी पहचान एक ऐसे शख्स के रूप में रही, जिसने राजनीति के सबसे प्रभावशाली परिवार का हिस्सा होते हुए भी सत्ता की चकाचौंध से दूरी बनाए रखी।

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