अद्धयात्म

1000 साल पुराने वडक्कुनाथन मंदिर में छिपा है अनोखा रहस्य, शिवलिंग पर चढ़ता घी न पिघलता, न होता खराब

नई दिल्ली : केरल के त्रिशूर शहर में स्थित प्राचीन वडक्कुनाथन मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला, शांत वातावरण और सदियों पुरानी परंपराओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। एक छोटी पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है, जहां पहुंचते ही भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। हर साल यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, वहीं प्रसिद्ध त्रिशूर पूरम उत्सव भी इसी मंदिर से जुड़ा हुआ है।

मान्यता के अनुसार इस मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी, जिन्होंने केरल की भूमि बसाने के बाद यहां भगवान शिव की पूजा की परंपरा शुरू करवाई थी। इतिहासकारों के मुताबिक यह मंदिर 1000 साल से भी अधिक पुराना है, हालांकि समय-समय पर इसका पुनर्निर्माण और संरक्षण किया गया है। मंदिर की वास्तुकला पारंपरिक केरल शैली में बनी है, जिसमें लकड़ी की नक्काशी और तांबे की छत इसकी विशेष पहचान हैं। दीवारों पर बनी प्राचीन कलाकृतियां आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं।

वडक्कुनाथन मंदिर की सबसे चर्चित मान्यताओं में से एक यहां शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला घी है। कहा जाता है कि सदियों से लगातार घी अर्पित किए जाने के बावजूद यह न तो खराब होता है और न ही गर्मी में पिघलता है। यह परंपरा श्रद्धालुओं और पुजारियों के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है। भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर भगवान शिव सभी कष्टों को दूर करते हैं। मंदिर परिसर का वातावरण अत्यंत शांत और भव्य है। सुबह और शाम की आरती के समय ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठता है। त्रिशूर पूरम के दौरान यहां भव्य सजावट और हाथियों की शोभायात्रा आयोजित की जाती है, जो इसकी सांस्कृतिक भव्यता को और बढ़ा देती है।

वडक्कुनाथन मंदिर केरल के त्रिशूर शहर के केंद्र में स्थित है। यहां सड़क और रेल मार्ग दोनों से आसानी से पहुंचा जा सकता है। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन त्रिशूर है, जबकि निकटतम हवाई अड्डा कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। वहां से टैक्सी और बस सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यहां यात्रा और दर्शन के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

Related Articles

Back to top button