छत्तीसगढ़ विधानसभा में जल्द पेश हो सकता है मतांतरण विरोधी नया विधेयक, कानूनी अड़चन हुई दूर

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में मतांतरण रोकने के लिए नया और प्रभावी कानून लाने की राह साफ हो गई है। वर्ष 2006 में डॉ. रमन सिंह सरकार के दौरान पारित धर्म स्वतंत्रता संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति द्वारा वापस भेजे जाने के बाद अब राज्यपाल ने इसे पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटा दिया है। इस संवैधानिक प्रक्रिया के पूरा होने के साथ ही प्रदेश में नया विधेयक पेश करने का मार्ग खुल गया है।
स्पीकर ने दी जानकारी
सदन में स्पीकर ने सोमवार को विधेयक लौटाने की जानकारी दी। इसके साथ ही विधेयक को लेकर लंबित कानूनी तकनीकी समस्या दूर हो गई है, जिससे नए कानून के लागू होने की राह आसान हो गई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की तैयारी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार इसी बजट सत्र में नया छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026 पेश करने की तैयारी में है। यह नया मसौदा पहले ही सरकार से मंजूरी प्राप्त कर चुका है और अब विधानसभा में पेश होने की प्रतीक्षा कर रहा है।
राज्य में मतांतरण की गंभीरता
छत्तीसगढ़ में मतांतरण की घटनाओं की गंभीरता को आंकड़ों से समझा जा सकता है। पिछले एक वर्ष में कुल 96 मामले दर्ज किए गए, जिनमें अकेले बिलासपुर जिले में 32 मामले शामिल हैं। नया विधेयक लागू होने के बाद जबरन मतांतरण की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।



