वट सावित्री व्रत पर बरगद के पेड़ के नीचे करें यह विशेष उपाय, पति की तरक्की और वैवाहिक जीवन में बढ़ेगी सुख-समृद्धि

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। हर वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
यह व्रत पौराणिक कथा सावित्री और सत्यवान से जुड़ा हुआ है, जिसमें सावित्री ने अपने पतिव्रत धर्म और भक्ति के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण इस दिन वट वृक्ष की पूजा को अत्यंत फलदायी माना जाता है।
वट सावित्री व्रत कब मनाया जाएगा
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 05 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 17 मई की रात 01 बजकर 30 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर इस वर्ष वट सावित्री व्रत 16 मई, शनिवार को मनाया जाएगा।
बरगद के पेड़ के नीचे करें यह विशेष पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ के नीचे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर पति-पत्नी को मिलकर बरगद के पेड़ की 11 परिक्रमा करनी चाहिए।
मान्यता है कि ऐसा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है, रिश्तों में मधुरता आती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
माता लक्ष्मी की पूजा से दूर होती हैं आर्थिक बाधाएं
इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, लक्ष्मी माता को 11 पीली कौड़ियां अर्पित करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और धन-समृद्धि के मार्ग खुलते हैं।
यदि पीली कौड़ियां उपलब्ध न हों तो सफेद कौड़ियों को हल्दी से रंगकर भी अर्पित किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यता और लाभ
शास्त्रों के अनुसार, वट सावित्री व्रत के दिन बरगद की पूजा करने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह व्रत न केवल पति की लंबी उम्र का प्रतीक है, बल्कि घर-परिवार में समृद्धि और खुशहाली लाने वाला भी माना जाता है।



