
नई दिल्ली: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपने खानपान को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस अवधि में लिया गया असंतुलित आहार न केवल मां के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी गंभीर असर डाल सकता है। इसी कड़ी में कुछ फलों के सेवन को लेकर भी सावधानी बरतने की बात सामने आई है, जिन्हें सीमित या पूरी तरह से टालने की सलाह दी जाती है।
अंगूर के सेवन को लेकर बरतें सावधानी
जानकारी के अनुसार अंगूर में कोई ऐसा तत्व नहीं पाया जाता जो सामान्य स्थिति में हानिकारक हो, लेकिन गर्भावस्था की तीसरी तिमाही यानी छह से नौ महीने के दौरान इसके सेवन से परहेज करने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि इस अवधि में अंगूर शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है, जो गर्भवती महिला और भ्रूण दोनों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
कच्चा पपीता हो सकता है जोखिमपूर्ण
गर्भावस्था में कच्चे या अधपके पपीते के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है। बताया जाता है कि इसमें मौजूद लेटेक्स तत्व गर्भाशय में संकुचन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, जिससे गर्भस्थ शिशु पर खतरा बढ़ सकता है। हालांकि पूरी तरह पके पपीते को लेकर विशेषज्ञ सामान्य तौर पर इसे सुरक्षित मानते हैं, लेकिन अनिश्चित स्थिति में इससे दूरी बनाए रखना बेहतर माना जाता है।
अनानास के सेवन पर भी जताई गई सावधानी
गर्भावस्था के दौरान अनानास के सेवन को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। इसमें मौजूद कुछ एंजाइम्स सर्विक्स के गुणों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे समय से पहले संकुचन की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा कुछ मामलों में इससे पाचन संबंधी दिक्कतें, जैसे डायरिया, की आशंका भी जताई जाती है।
गर्भावस्था में संतुलित आहार पर जोर
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को विटामिन, मिनरल, फोलिक एसिड, पोटैशियम और डाइटरी फाइबर से भरपूर आहार लेना चाहिए। ताजे फल इन पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माने जाते हैं, लेकिन कुछ विशेष फलों के सेवन में सावधानी आवश्यक है, ताकि किसी भी तरह की जटिलता या स्वास्थ्य जोखिम से बचा जा सके।



