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संयुक्त किसान मोर्चा ने किया भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध, पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पुतले जलाए

कृषि एवं कृषि-आधारित गतिविधियों से उत्पन्न सभी उत्पादों को पूर्णतः बाहर रखा जाए।

Meerut News : आज संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के आह्वान पर भारत-अमेरिका के मध्य व्यापार समझौते के विरोध में देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पुतले जलाए गए। श्री जगजीत सिंह डल्लेवाल व अन्य किसान नेताओं ने बताया कि भारत की लगभग आधी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि एवं उससे संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। भारतीय कृषि मुख्यतः छोटे एवं सीमांत किसानों पर आधारित है। जबकि अमेरिका में कृषि बड़े पैमाने पर यंत्रीकृत, कॉर्पोरेट आधारित तथा भारी सरकारी सहायता एवं सब्सिडी प्राप्त व्यवस्था के अंतर्गत संचालित होती है।
भारतीय किसानों के लिए अत्यंत हानिकारक
ऐसी असमान परिस्थितियों में दोनों देशों के कृषि उत्पादों के बीच खुली प्रतिस्पर्धा भारतीय किसानों के लिए अत्यंत हानिकारक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि यदि कृषि, डेयरी, पोल्ट्री तथा अन्य कृषि-आधारित उत्पादों को मुक्त व्यापार समझौते के अंतर्गत शामिल किया जाता है अथवा अमेरिकी उत्पादों को कम या शून्य शुल्क पर भारत में प्रवेश दिया जाता है, तो इससे भारतीय किसानों की आय, कृषि रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेंगे।
मुक्त व्यापार समझौते के संभावित खतरे एवं नकारात्मक प्रभाव
भारतीय किसानों को असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा क्योंकि अमेरिकी किसानों को अरबों डॉलर की सरकारी सहायता, फसल बीमा, निर्यात प्रोत्साहन तथा अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त होते हैं। डेयरी क्षेत्र पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और करोड़ों छोटे पशुपालकों की आजीविका डेयरी व्यवसाय पर निर्भर है। सस्ते आयातित डेयरी उत्पाद भारतीय दुग्ध उत्पादकों को भारी नुक्सान पहुंचाएंगे। पोल्ट्री एवं पशुपालन क्षेत्र प्रभावित होगा। अमेरिकी पोल्ट्री उत्पादों के आयात से देश के लाखों छोटे पोल्ट्री उत्पादकों और श्रमिकों की आजीविका संकट में पड़ सकती है।
फसलों के लाभकारी मूल्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सस्ते आयात के कारण घरेलू बाजार में कीमतें गिर सकती हैं जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलेगा।
संयुक्त किसान मोर्चा की प्रमुख मांगें
भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते से कृषि, डेयरी, पोल्ट्री, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा अन्य कृषि एवं कृषि-आधारित गतिविधियों से उत्पन्न सभी उत्पादों को पूर्णतः बाहर रखा जाए। भारी सरकारी सब्सिडी एवं अन्य वित्तीय सहायता प्राप्त अमेरिकी कृषि, डेयरी, पोल्ट्री तथा संबंधित उत्पादों के भारत में कर-मुक्त अथवा न्यूनतम शुल्क पर आयात की अनुमति न दी जाए। किसी भी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पूर्व किसान संगठनों से व्यापक परामर्श किया जाए। भारत सरकार यह सुनिश्चित करे कि वर्तमान में चल रही भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता वार्ताओं के दौरान कृषि, डेयरी, पोल्ट्री, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा अन्य कृषि-संबंधित क्षेत्रों के हितों के प्रतिकूल कोई भी प्रतिबद्धता या समझौता स्वीकार न किया जाए तथा इन क्षेत्रों को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए।

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