मध्य प्रदेशराज्य

38 हजार कर्मचारियों पर सरकार की बड़ी नजर! सर्विस रिकॉर्ड की होगी पड़ताल, गलत वेतन लेने वालों पर कार्रवाई तय

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने हजारों कर्मचारियों के वेतन और सेवा अभिलेखों की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है। राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत करीब 38 हजार कार्यभारित और आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारियों सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड और वेतन निर्धारण की सेवानिवृत्ति से पहले विस्तृत जांच की जाएगी। जांच में यदि किसी कर्मचारी को नियमों के विपरीत वित्तीय लाभ दिए जाने के मामले सामने आते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकार के वित्त विभाग ने लंबित वेतन निर्धारण, वेतनमान स्वीकृति और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़े मामलों के त्वरित निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका, वेतन निर्धारण और वित्तीय लाभों से जुड़े रिकॉर्ड की गहन समीक्षा की जाएगी।

इन पांच विभागों पर रहेगा विशेष फोकस

सरकार की समीक्षा में सामने आया है कि सबसे अधिक लंबित मामले और वेतन संबंधी विवाद कुछ प्रमुख विभागों में हैं। इसी वजह से विशेष अभियान मुख्य रूप से पांच विभागों में चलाया जाएगा।

लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, नर्मदा घाटी विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग को इस अभियान के केंद्र में रखा गया है। इन विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के लंबित मामलों की प्राथमिकता के आधार पर जांच और निराकरण किया जाएगा।

वेतनमान और क्रमोन्नति से जुड़े विवाद होंगे खत्म

वित्त विभाग के अनुसार वेतनमान, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति, वेतन निर्धारण और सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में विवाद लंबित हैं। इन विवादों के कारण कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विशेष अभियान के दौरान ऐसे सभी मामलों की समीक्षा कर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा, ताकि कर्मचारियों को उनके पात्र लाभ समय पर मिल सकें और वर्षों से लंबित प्रकरणों का समाधान हो सके।

छह महीने में पूरा करना होगा अभियान

वित्त विभाग ने सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं का परीक्षण करें और किसी भी प्रकार की त्रुटि मिलने पर उसका तत्काल सुधार सुनिश्चित करें।

यदि किसी मामले में पूर्व स्वीकृति या अनुमोदन की आवश्यकता है तो संबंधित प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। सरकार ने इस पूरे अभियान को पूरा करने के लिए छह माह की समयसीमा निर्धारित की है।

लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही

वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभियान में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।

साथ ही विभागों को अभियान की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से वित्त विभाग को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि पूरे अभियान की निगरानी की जा सके।

सेवानिवृत्त और कार्यरत कर्मचारियों के मामलों की होगी समीक्षा

विशेष अभियान के तहत सेवा में कार्यरत और सेवानिवृत्त दोनों श्रेणी के कर्मचारियों के मामलों की जांच की जाएगी। वेतन निर्धारण, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति वेतनमान और अन्य वित्तीय लाभों से जुड़े मामलों का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का उद्देश्य एक ओर लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करना है, वहीं दूसरी ओर नियमों के विरुद्ध दिए गए किसी भी वित्तीय लाभ की पहचान कर प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना भी है।

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