राज्यसभा चुनाव में बढ़ा सियासी घमासान! MP में कांग्रेस के भीतर असंतोष, झारखंड में सहयोगी दलों की खींचतान से BJP उत्साहित

नई दिल्ली: राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्य प्रदेश और झारखंड में विपक्षी दलों के भीतर उभर रहे मतभेदों ने राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे दी है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवार को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाएं हैं, जबकि झारखंड में उम्मीदवार चयन को लेकर झामुमो और कांग्रेस के बीच तनातनी सामने आई है। इन परिस्थितियों ने भाजपा को दोनों राज्यों में अतिरिक्त सीटों की संभावनाओं को लेकर सक्रिय कर दिया है।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस द्वारा राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी की चर्चा तेज हो गई है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के नाम को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सामने एकजुटता की चुनौती
पार्टी सूत्रों के अनुसार, उम्मीदवार चयन के बाद कुछ विधायकों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि छिंदवाड़ा क्षेत्र के कांग्रेस विधायकों को कमलनाथ के नाम की उम्मीद थी। ऐसे में अब उनकी राजनीतिक रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।
स्थिति को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व सतर्क हो गया है। पार्टी ने विधायकों की बैठक बुलाकर चुनावी रणनीति पर चर्चा करने का फैसला किया है। कांग्रेस नहीं चाहती कि पिछले चुनावों की तरह क्रॉस वोटिंग की स्थिति उत्पन्न हो और उसे नुकसान उठाना पड़े।
बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश संगठन और विधायकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि चुनाव में अनुशासन बनाए रखना प्राथमिकता होगी और किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग को गंभीरता से लिया जाएगा।
झारखंड में सहयोगी दलों के बीच बढ़ी नाराजगी
झारखंड में भी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। यहां दो सीटों पर चुनाव होना है और विपक्षी गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने लायक संख्या बल मौजूद है। हालांकि उम्मीदवार चयन को लेकर झामुमो और कांग्रेस के बीच मतभेद की खबरों ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार के नाम की घोषणा से पहले पर्याप्त चर्चा नहीं किए जाने को लेकर झामुमो के भीतर नाराजगी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस मुद्दे पर विधायकों की बैठक बुलाई, जिसमें दोनों सीटों पर मजबूत दावेदारी की बात उठाई गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सहयोगी दलों के बीच समन्वय में कमी बनी रहती है तो इसका फायदा भाजपा उठाने की कोशिश कर सकती है।
भाजपा ने बढ़ाई राजनीतिक सक्रियता
मध्य प्रदेश और झारखंड दोनों राज्यों में विपक्षी दलों के भीतर चल रही खींचतान के बीच भाजपा ने संभावित अवसरों पर नजरें टिका दी हैं। पार्टी पहले से ही अपने संख्याबल और चुनावी गणित का आकलन कर रही है।
झारखंड में भाजपा पहले ही एक उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर चुकी है, जबकि मध्य प्रदेश में भी अतिरिक्त सीट पर दावेदारी की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।
क्या कहता है मध्य प्रदेश का विधानसभा गणित?
मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान में कुल 229 विधायक हैं। इनमें भाजपा के पास 164 विधायक जबकि कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 मतों की आवश्यकता है।
इस गणित के अनुसार भाजपा दो सीटों पर जीत सुनिश्चित करने की स्थिति में है और उसके पास अतिरिक्त मत भी बचते हैं। वहीं कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या है, लेकिन उसे अपने सभी विधायकों को एकजुट बनाए रखना होगा।
राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की तारीख नजदीक आते ही दोनों राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और अब सभी की नजरें विधायकों की रणनीति तथा दलों की एकजुटता पर टिकी हुई हैं।



