मध्य प्रदेशराज्य

40 साल बाद भोपाल गैस त्रासदी के निशान मिटाने की पहल! CM मोहन यादव बोले- यूनियन कार्बाइड का कचरा हटने से खत्म हुआ कलंक

भोपाल: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल गैस त्रासदी को प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का सबसे बड़ा और सबसे दुखद उदाहरण बताते हुए कहा कि इस घटना ने मानव जीवन और पर्यावरण दोनों को गहरा नुकसान पहुंचाया था। उन्होंने कहा कि चार दशक बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में पड़े कचरे के निपटारे का कार्य पूरा हो जाने से भोपाल की धरती से इस त्रासदी का एक बड़ा कलंक मिटा है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अब यूनियन कार्बाइड की जमीन के उचित प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ रही है।

गैस त्रासदी को बताया प्रकृति से छेड़छाड़ का परिणाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1984 की भोपाल गैस त्रासदी देश ही नहीं, दुनिया की सबसे भयावह औद्योगिक घटनाओं में गिनी जाती है। इस हादसे ने हजारों लोगों की जान ली और बड़ी संख्या में लोग स्थायी रूप से प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं इस बात की चेतावनी हैं कि प्रकृति और पर्यावरण के साथ असंतुलित हस्तक्षेप कितने गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।

40 साल बाद फैक्ट्री के कचरे का निपटारा

मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने लंबे समय से लंबित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में मौजूद कचरे के निपटारे का कार्य पूरा कर लिया है। उनके अनुसार, इस कदम से भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े एक महत्वपूर्ण अध्याय को समाप्त करने की दिशा में प्रगति हुई है।

उन्होंने बताया कि अब सरकार फैक्ट्री की भूमि के भविष्य और उसके प्रबंधन को लेकर आगे की कार्ययोजना पर काम कर रही है।

हरित ऊर्जा परियोजनाओं पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास और जलविद्युत परियोजनाओं के विस्तार पर तेजी से काम चल रहा है।

उन्होंने बताया कि सांची, खजुराहो और अन्य क्षेत्रों में भी हरित ऊर्जा से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य ऊर्जा जरूरतों को पर्यावरण अनुकूल तरीके से पूरा करना है।

वन्यजीव संरक्षण को लेकर भी सरकार सक्रिय

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जैव विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन की दिशा में भी पहल की जा रही है।

सनातन संस्कृति में निहित है पर्यावरण संरक्षण का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की भावना भारतीय परंपरा और सनातन संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के पांच तत्वों का महत्व हमारी जीवनशैली, परंपराओं और पूजा-पद्धति में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

उनके अनुसार, भारतीय संस्कृति में वृक्षों को विशेष महत्व दिया गया है और पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक दायित्व के रूप में देखा गया है।

जल स्रोतों के संरक्षण पर भी जोर

मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत प्रदेश में नदियों, कुओं, बावड़ियों और तालाबों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है।

कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक बरनवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Related Articles

Back to top button