अमित शाह का बड़ा ऐलान: जल्द शुरू होगा ‘स्मार्ट बॉर्डर’, घुसपैठियों, ड्रग्स और तस्करों पर कसेगा शिकंजा

अगरतला: देश की सीमाओं को और अधिक सुरक्षित और अभेद्य बनाने की दिशा में केंद्र सरकार का महत्वाकांक्षी ‘स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट’ अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को त्रिपुरा के लंकामुरा बॉर्डर आउटपोस्ट पर बीएसएफ जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि अत्याधुनिक तकनीक से लैस नया सुरक्षा तंत्र जल्द ही लागू किया जाएगा, जिससे घुसपैठ, मानव तस्करी, हथियारों की तस्करी और मादक पदार्थों की अवैध आवाजाही पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
अमित शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सीमाओं को केवल फेंसिंग के जरिए सुरक्षित करना नहीं, बल्कि तकनीक, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के समन्वय से एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड तैयार करना है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां सीमा सुरक्षा बल के जवान तैनात हैं, वहां स्मार्ट बॉर्डर की अवधारणा को लागू किया जाएगा।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा नया सुरक्षा तंत्र
गृह मंत्री ने बताया कि स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक निगरानी तकनीकों, स्थानीय प्रशासनिक तंत्र और सीमा पर तैनात जवानों को एकीकृत किया जाएगा। इसके माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी और सुरक्षा चुनौतियों का त्वरित समाधान संभव होगा।
उन्होंने कहा कि देश में 7 से 8 स्थानों पर इस अवधारणा को पायलट परियोजना के रूप में लागू किया जाएगा। साथ ही गृह सचिव और बीएसएफ महानिदेशक से सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन करने का आग्रह भी किया।
हर सीमा की चुनौती अलग, लेकिन सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
अमित शाह ने कहा कि देश की अलग-अलग सीमाओं की अपनी विशिष्ट चुनौतियां हैं। कहीं मानव तस्करी की समस्या है तो कहीं हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी बड़ा खतरा बनी हुई है। उन्होंने बीएसएफ जवानों की सराहना करते हुए कहा कि सुरक्षा बल इन चुनौतियों का पूरी प्रतिबद्धता के साथ मुकाबला कर रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका होगी अहम
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए केवल सुरक्षा बलों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक, पटवारी, ग्राम प्रधान और अन्य स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों को भी इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रशासन को सुरक्षा तंत्र में सक्रिय रूप से शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक सीमाओं को पूरी तरह अभेद्य बनाना संभव नहीं होगा।
2047 के लक्ष्य से जुड़ा है बॉर्डर सुरक्षा मिशन
अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सीमाओं पर अवैध गतिविधियों को रोकना बेहद जरूरी है। नकली नोटों की तस्करी, मानव तस्करी और मादक पदार्थों की आपूर्ति जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों के लिए आवश्यक है।
119 किलोमीटर नई फेंसिंग को मिली मंजूरी
गृह मंत्री ने बताया कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगभग 650 किलोमीटर पुरानी फेंसिंग के आधुनिकीकरण की योजना पर काम चल रहा है। इसके तहत पहले चरण में 119 किलोमीटर नई फेंसिंग लगाने को मंजूरी दी गई है।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती चौकियों पर तैनात जवानों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बिजली आपूर्ति, हरित ऊर्जा और सुरक्षित पेयजल जैसी कई परियोजनाएं शुरू की गई थीं, जिन्हें अब पूरा भी कर लिया गया है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर रहेगा विशेष फोकस
अमित शाह ने दोहराया कि सरकार अगले वर्ष तक तकनीक आधारित स्मार्ट बॉर्डर व्यवस्था को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसका उद्देश्य पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी करीब 6000 किलोमीटर लंबी सीमा की निगरानी को और प्रभावी बनाना है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस यह सुरक्षा व्यवस्था देश में अवैध घुसपैठ, तस्करी और जनसांख्यिकीय बदलाव की किसी भी साजिश को विफल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



