POK में हिंसा का विस्फोट! प्रदर्शनकारियों पर चली गोलियां, 27 मौतों का दावा, चुनाव से पहले हालात बेहद तनावपूर्ण

नई दिल्ली: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में राजनीतिक विवाद अब गंभीर हिंसा में बदलता दिखाई दे रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भड़के विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होते जा रहे हैं। रावलकोट सहित कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की खबर है। स्थानीय दावों के मुताबिक अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं।
मोर्चरी के बाहर जुटी भीड़ के बाद भड़की हिंसा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तनाव उस समय और बढ़ गया जब JAAC समर्थक एक अस्पताल की मोर्चरी के बाहर एकत्र हुए, जहां संगठन के एक कार्यकर्ता का शव रखा गया था। बताया जा रहा है कि उसकी मौत पहले हुई गोलीबारी की घटना में हुई थी। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने कार्रवाई की, जिसके बाद स्थिति बेकाबू हो गई और दोनों पक्षों के बीच हिंसक टकराव शुरू हो गया।
सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों को भी हुआ नुकसान
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि हिंसा के दौरान कई सुरक्षाकर्मी भी हताहत हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। घटनाओं में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। इसके अलावा कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
मौत और घायलों के आंकड़ों पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों और JAAC समर्थकों ने प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि मृतकों और घायलों की वास्तविक संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकती है। क्षेत्र में संचार सेवाओं पर प्रतिबंध और कड़े सुरक्षा इंतजामों के चलते स्वतंत्र रूप से हालात की पुष्टि करना मुश्किल बताया जा रहा है।
12 आरक्षित सीटों के फैसले से शुरू हुआ विवाद
ताजा आंदोलन की प्रमुख वजह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर लिया गया फैसला माना जा रहा है। 45 सदस्यीय विधानसभा में ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो स्वयं को कश्मीर से जुड़ा बताते हैं, लेकिन वर्तमान में पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रह रहे हैं।
स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इस व्यवस्था से क्षेत्र के मूल निवासियों की राजनीतिक भागीदारी और प्रभाव कमजोर होगा, जबकि बाहरी हस्तक्षेप को बढ़ावा मिलेगा। इसी मुद्दे को लेकर लंबे समय से विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
महंगाई, बिजली संकट और बेरोजगारी भी बने बड़े मुद्दे
आरक्षित सीटों के विवाद के साथ-साथ आंदोलनकारी महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी और प्रशासनिक उपेक्षा जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठा रहे हैं। बीते दो वर्षों के दौरान बिजली और आटे की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कई बड़े प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें कई बार सुरक्षा बलों के साथ टकराव की घटनाएं भी सामने आई थीं।
प्रतिबंध और इंटरनेट बंदी से बढ़ा लोगों का आक्रोश
9 जून को बुलाया गया बंद केवल आरक्षित सीटों के विरोध तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शनकारी संगठन पर लगाए गए प्रतिबंध, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और संगठन से जुड़े एक नेता की हत्या के विरोध में भी सड़कों पर उतरे। हाल ही में प्रशासन ने JAAC को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया।
मानवाधिकार आयोग ने जताई गंभीर चिंता
पूरे घटनाक्रम को लेकर पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने चिंता व्यक्त की है। आयोग ने सवाल उठाया है कि किसी राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित करना कितना उचित है। आयोग का मानना है कि राजनीतिक भागीदारी सीमित होने से जनता में असंतोष बढ़ रहा है और संवाद ही समाधान का प्रभावी रास्ता हो सकता है।
आयोग ने हालात की जांच के लिए तथ्य-खोजी दल भेजने की घोषणा की है और सरकार से बातचीत शुरू कर तनाव कम करने की अपील भी की है।
चुनाव से पहले कड़े किए गए सुरक्षा इंतजाम
27 जुलाई को प्रस्तावित चुनावों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी है। कई क्षेत्रों में मोबाइल डेटा सेवाएं बंद कर दी गई हैं, जबकि बड़ी सार्वजनिक सभाओं पर भी रोक लगा दी गई है। संगठन के केंद्रीय कार्यालय को सील किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
विदेशी देशों ने जारी की यात्रा सलाह
क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी परामर्श जारी किया है। इन देशों ने चेतावनी दी है कि हालात बिगड़ने की स्थिति में सड़कें बंद हो सकती हैं, संचार सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के कारण आवागमन में बाधाएं आ सकती हैं। विदेशी नागरिकों को प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।



