
करनाल: बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर अमेरिका गए हरियाणा के एक युवक की दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई। जिस इकलौते बेटे को परिवार ने 50 लाख रुपये खर्च कर विदेश भेजा था, उसका शव वापस भारत लाने के लिए भी करीब 25 लाख रुपये खर्च करने पड़े। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
24 वर्षीय गौरव, हरियाणा के करनाल जिले के बालरागड़ान गांव का रहने वाला था। वह करीब दो साल पहले अमेरिका गया था और कैलिफोर्निया में ट्रक चालक के रूप में काम कर रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी कर वह उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा, लेकिन एक हादसे ने सभी सपनों को चकनाचूर कर दिया।
आखिरी फोन कॉल के बाद आया मौत का संदेश
परिजनों के मुताबिक 26 मई को गौरव ने अपने पिता रामफल से आखिरी बार फोन पर बात की थी। उसने बताया था कि वह ट्रक लेकर डिलीवरी के लिए जा रहा है और रास्ते में एक रेस्टोरेंट पर चाय पीने के लिए रुका है। उसने कुछ देर बाद दोबारा बात करने का वादा किया था, लेकिन वह कॉल आखिरी साबित हुई।
बताया गया कि रेस्टोरेंट से निकलने के कुछ समय बाद गौरव के ट्रक का संतुलन बिगड़ गया और वाहन सड़क से नीचे खाई में जा गिरा। हादसा इतना भीषण था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। 27 मई को अमेरिकी अधिकारियों ने परिवार को इस दुखद घटना की जानकारी दी।
शव को भारत लाने में भी आई बड़ी चुनौती
गौरव की मौत के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसका शव भारत लाना था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई स्तरों पर सहायता की कोशिश की, लेकिन कोई विशेष मदद नहीं मिल सकी। आखिरकार अमेरिका में रह रहे भारतीय परिचितों की मदद से शव को भारत भेजने की व्यवस्था की गई।
परिवार के अनुसार, शव को अमेरिका से भारत लाने में करीब 25 लाख रुपये खर्च हुए। सोमवार देर शाम शव दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, जहां से एम्बुलेंस के जरिए उसे गांव लाया गया। बेटे का पार्थिव शरीर देखते ही मां और बहन बेसुध हो गईं और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
प्लॉट और दुकान बेचकर जुटाए थे 50 लाख रुपये
गौरव के पिता रामफल ने बताया कि उनका बेटा विदेश जाकर परिवार की आर्थिक हालत सुधारना चाहता था। उन्होंने उसे रोकने की कोशिश भी की, लेकिन वह अमेरिका जाने के अपने फैसले पर अडिग था। इसके बाद एक एजेंट के माध्यम से उसे डंकी रूट से अमेरिका भेजा गया।
परिवार ने इस पूरी प्रक्रिया पर करीब 50 लाख रुपये खर्च किए। इतनी बड़ी रकम जुटाने के लिए उन्हें अपना प्लॉट और दुकान तक बेचनी पड़ी। करीब छह महीने की कठिन और जोखिम भरी यात्रा के बाद गौरव अमेरिका पहुंचा था।
इकलौते बेटे की मौत से टूट गया परिवार
रामफल के पास करीब दो एकड़ कृषि भूमि है और खेती ही परिवार की आय का मुख्य स्रोत है। गौरव परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी एक छोटी बहन है, जिसकी शादी करीब एक वर्ष पहले हो चुकी है। अब घर में केवल माता-पिता ही रह गए हैं।
गांव में पूरे सम्मान के साथ गौरव का अंतिम संस्कार किया गया। कांपते हाथों से पिता ने अपने इकलौते बेटे को मुखाग्नि दी। इस मार्मिक दृश्य ने मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।
डंकी रूट के खतरों पर फिर उठे सवाल
गौरव की मौत ने एक बार फिर अवैध रास्तों से विदेश जाने के बढ़ते चलन और उससे जुड़े खतरों को उजागर कर दिया है। बेहतर जीवन और अधिक कमाई के सपने में कई परिवार अपनी जीवनभर की जमा पूंजी दांव पर लगा देते हैं, लेकिन कई बार यह सपना आर्थिक बर्बादी और पारिवारिक त्रासदी में बदल जाता है।



