
नई दिल्ली: मणिपुर में सुरक्षा बलों के बड़े संयुक्त अभियान के दौरान लेइलोन वैफेई गांव से छह नागरिकों के शव बरामद किए गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि ये शव उन छह नागा नागरिकों के हैं, जो 13 मई से लापता थे और जिन्हें कोंशाखुल से लौटते समय बंधक बना लिया गया था। शव मिलने की सूचना फैलते ही इम्फाल में तनाव का माहौल बन गया। जेएनआईएमएस अस्पताल के बाहर जुटी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
450 जवानों ने चलाया 24 घंटे का सर्च ऑपरेशन
मणिपुर पुलिस के मुताबिक राज्य पुलिस, सीआरपीएफ और असम राइफल्स के करीब 450 जवानों ने संयुक्त अभियान चलाया। इस दौरान स्निफर डॉग्स और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से प्रभावित इलाके की व्यापक तलाशी ली गई। लगभग 24 घंटे तक चले अभियान के बाद बुधवार दोपहर छह शव बरामद किए गए। इसके बाद कानूनी प्रक्रियाएं शुरू की गईं।
शवों की हालत इतनी खराब कि पहचान मुश्किल
अधिकारियों के अनुसार बरामद शव अत्यधिक सड़े-गले और क्षत-विक्षत अवस्था में मिले हैं। उनकी बाहरी पहचान संभव नहीं हो सकी है। शवों को डीएनए परीक्षण के लिए इम्फाल स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज भेजा जाएगा, ताकि उनकी पहचान की पुष्टि की जा सके।
अस्पताल के बाहर बढ़ा तनाव, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले
शवों को जांच के लिए अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद मृतकों के परिजन और नागा समुदाय के लोग बड़ी संख्या में वहां जमा हो गए। स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती चली गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की और हालात बिगड़ते देख आंसू गैस के गोले दागे।
13 मई से लापता थे छह नागा नागरिक
परिजनों और सामुदायिक संगठनों के अनुसार लापता लोगों की पहचान मनु थियुमाई, केनपीबौ, फेनरॉन्गवी थियुमाई, दिलीप थियुमाई, कालिवान्गबौ अबोनमाई और सीएच फेन्रीलुंग के रूप में की गई है। सभी 13 मई को कोंशाखुल से लौट रहे थे, तभी कांगपोकपी जिले के लेइलोन वैफेई गांव के पास से अचानक लापता हो गए थे। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया था।
जातीय हिंसा से जुड़ा है पूरा मामला
यह घटना 13 मई को नोनी और कांगपोकपी जिलों के कुछ हिस्सों में भड़की जातीय हिंसा से जुड़ी बताई जा रही है। उस दिन तीन चर्च नेताओं और एक नागा नागरिक समेत चार लोगों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद बढ़ते तनाव के बीच नागा और कुकी समुदायों के कुल 48 नागरिकों को विरोधी समूहों ने बंधक बना लिया था। दो दिन बाद दोनों पक्षों की ओर से 14-14 बंधकों को रिहा कर दिया गया था।
कुकी संगठन ने भी जताया दुख
यूनाइटेड नागा काउंसिल के अध्यक्ष एनजी लोर्हो ने कहा कि उन्होंने मानवीय आधार पर अपने कब्जे में मौजूद 14 कुकी नागरिकों को बिना किसी शर्त के रिहा किया था, क्योंकि सरकार ने नागा बंधकों की तलाश का भरोसा दिया था। वहीं, शीर्ष कुकी संगठन ‘कुकी इनपी मणिपुर’ ने भी घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए निष्पक्ष कानूनी जांच की मांग की है।
मुख्यमंत्री ने की कड़ी निंदा, NIA को मिली जांच
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने संदिग्ध सशस्त्र उग्रवादियों द्वारा नागा ग्रामीणों के कथित अपहरण और हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे जघन्य अपराधों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने पूरे अपहरण और हत्याकांड की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी है।
किसान की हत्या पर भी मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री ने तामेंगलोंग जिले के तमेई थाना क्षेत्र के लांसन कुकी गांव में एक किसान की संदिग्ध बदमाशों द्वारा की गई हत्या की भी कड़ी आलोचना की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
शव मिलने की खबर के बाद आगजनी
बुधवार शाम छह नागा बंधकों के शव मिलने की सूचना फैलने के बाद सेनापति जिले में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। उग्र भीड़ ने दो ट्रकों को आग के हवाले कर दिया। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।



