
नई दिल्ली: 26 जून 2026 को आकाशीय पटल पर एक दुर्लभ ज्योतिषीय घटना देखने को मिलेगी। द्रिक पंचांग के अनुसार सुबह 4 बजकर 6 मिनट पर सूर्य देव और वरुण ग्रह एक-दूसरे से 90 डिग्री की दूरी पर आकर ‘सूर्य-वरुण केंद्र योग’ का निर्माण करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को अत्यंत संवेदनशील और कई मामलों में चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
क्या होता है सूर्य-वरुण केंद्र योग?
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सूर्य आत्मा, आत्मविश्वास और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि वरुण ग्रह को भ्रम, धोखा, अज्ञात भय और मानसिक अस्थिरता का कारक माना जाता है। जब ये दोनों ग्रह 90 डिग्री की स्थिति में आते हैं, तो इसे केंद्र योग कहा जाता है, जिसका प्रभाव व्यक्ति की निर्णय क्षमता और मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है।
5 राशियों पर पड़ सकता है विशेष प्रभाव
इस ज्योतिषीय योग का असर सभी राशियों पर अलग-अलग तरीके से देखने को मिल सकता है, लेकिन विशेष रूप से 5 राशियों के लिए इसे चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है।
मेष राशि (Aries)
इस अवधि में मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति बन सकती है। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों के साथ तालमेल में कमी आ सकती है और बनते काम अंतिम समय पर अटक सकते हैं। आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मिथुन राशि (Gemini)
इस राशि के जातकों के लिए यह समय स्वास्थ्य और आर्थिक दृष्टि से उतार-चढ़ाव भरा हो सकता है। गलत निवेश और फिजूलखर्ची की संभावना बढ़ सकती है। पेट और आंखों से जुड़ी समस्याओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
सिंह राशि (Leo)
सूर्य के प्रभाव वाली इस राशि पर इस योग का गहरा असर देखने को मिल सकता है। कार्यस्थल पर मान-सम्मान से जुड़ी चुनौतियां आ सकती हैं और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है। अहंकार से बचने की सलाह दी गई है।
तुला राशि (Libra)
पारिवारिक जीवन और मानसिक शांति प्रभावित हो सकती है। पुराने विवाद फिर से उभर सकते हैं और संबंधों में तनाव की स्थिति बन सकती है। सोच-समझकर प्रतिक्रिया देने की सलाह दी गई है।
मीन राशि (Pisces)
इस राशि के जातकों को करियर और निजी जीवन दोनों में सावधानी रखने की जरूरत होगी। नकारात्मक विचारों और अज्ञात भय का प्रभाव बढ़ सकता है। किसी भी बड़े निर्णय को टालने की सलाह दी गई है।
ज्योतिषीय उपाय भी बताए गए
इस अवधि में सूर्य देव की उपासना करने, सुबह तांबे के लोटे से जल अर्पित करने और ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करने की सलाह दी गई है। साथ ही ध्यान, प्राणायाम और गायत्री मंत्र के नियमित पाठ से मानसिक संतुलन बनाए रखने की बात कही गई है।



