MP में सड़क हादसों का डरावना आंकड़ा! हर दिन 283 लोग हो रहे दुर्घटनाओं का शिकार, 61% पीड़ित युवा

भोपाल: मध्य प्रदेश में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनती जा रही है। राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से रोजाना सामने आने वाली दुर्घटनाओं के बीच 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा की ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े उजागर किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में प्रदेश में 1 लाख 3 हजार से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं।
आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन 283 लोग सड़क हादसों में घायल हुए। सबसे गंभीर बात यह है कि दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा असर युवाओं पर पड़ रहा है। कुल पीड़ितों में करीब 61 प्रतिशत युवा शामिल हैं।
युवा वर्ग पर सबसे ज्यादा खतरा
108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा की रिपोर्ट बताती है कि मई 2025 से मई 2026 के बीच प्रदेशभर में 1 लाख 3 हजार 294 सड़क दुर्घटना पीड़ितों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। इन मामलों में सबसे अधिक संख्या युवा आयु वर्ग की रही।
विशेषज्ञों के अनुसार तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और लापरवाह ड्राइविंग सड़क दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह बनकर उभरी हैं। यही कारण है कि युवा वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है।
किस आयु वर्ग के लोग सबसे ज्यादा हुए हादसों का शिकार?
रिपोर्ट के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों का आयु वर्ग के आधार पर प्रतिशत इस प्रकार है—
- 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग – 61 प्रतिशत
- 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग – 24 प्रतिशत
- 46 से 60 वर्ष आयु वर्ग – 9 प्रतिशत
- अन्य आयु वर्ग – 6 प्रतिशत
ये आंकड़े बताते हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर युवाओं में जागरूकता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।
गोल्डन ऑवर में पहुंच रही 108 एंबुलेंस सेवा
108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि उनकी टीम हर आपात स्थिति में गोल्डन ऑवर के भीतर पहुंचकर घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता देने का प्रयास करती है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक कॉल किसी की जिंदगी बचाने का अवसर होती है और टीम की प्राथमिकता कम से कम समय में घटनास्थल पर पहुंचकर मरीज को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना रहती है।
दुर्घटना की स्थिति में 108 सेवा का करें उपयोग
तरुण सिंह परिहार ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी सड़क दुर्घटना या स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति में निजी वाहन के बजाय 108 एंबुलेंस सेवा का उपयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि एंबुलेंस में जीवनरक्षक उपकरणों के साथ प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मौजूद रहता है, जो अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्राथमिक उपचार शुरू कर सकता है। इससे गंभीर मरीजों की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।
कुछ सेकंड की लापरवाही बदल सकती है जिंदगी
रिपोर्ट ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि सड़क पर की गई छोटी सी गलती भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। हालांकि बीते एक वर्ष में एक लाख से अधिक घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका यातायात नियमों का सख्ती से पालन करना है।
सुरक्षित ड्राइविंग, निर्धारित गति सीमा का पालन, हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य उपयोग तथा सड़क पर जिम्मेदार व्यवहार ही हादसों की संख्या कम करने का सबसे बड़ा उपाय माना जा रहा है।



