भोपाल से बिहार तक फैले संदिग्ध मॉड्यूल का खुलासा, ATS की बड़ी कार्रवाई; 6 गिरफ्तार, विदेशी कनेक्शन की जांच तेज

भोपाल: मध्य प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की जांच में एक ऐसे संदिग्ध नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसके तार मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा समेत कई राज्यों तक जुड़े होने की बात सामने आई है। अब तक इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि विदेशी संपर्कों और फंडिंग की दिशा में भी जांच एजेंसियां गहन पड़ताल कर रही हैं।
इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत 11 जून की तड़के हुई कार्रवाई से हुई, जब भोपाल के काजी कैंप इलाके में एटीएस की विशेष टीम ने गोपनीय अभियान चलाते हुए मोहम्मद फराज को हिरासत में लिया। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद में भी समानांतर कार्रवाई करते हुए नईम अब्दुल्ला को पकड़ा गया। दोनों अभियानों को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया।
एनआईए की निगरानी से खुला मामला
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी देशभर में संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों, विदेशी एप्लिकेशन, डार्क वेब नेटवर्क और सोशल मीडिया समूहों की लगातार निगरानी करती है। इसी दौरान भोपाल निवासी मोहम्मद फराज और देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला की गतिविधियां जांच एजेंसियों के रडार पर आईं।
प्रारंभिक जांच के बाद दोनों पर निगरानी बढ़ाई गई और आगे की कार्रवाई का जिम्मा मध्य प्रदेश एटीएस को सौंपा गया। पूछताछ के लिए दोनों को रिमांड पर लिया गया। बाद में फराज को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया, जबकि नईम अब्दुल्ला अभी भी एटीएस की रिमांड पर है।
युवाओं को प्रभावित करने की आशंका
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों पर विदेशी हैंडलरों से प्राप्त कट्टरपंथी सामग्री और विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने के आरोप हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को प्रभावित कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर मोड़ने का प्रयास किया जा रहा था।
एजेंसियों को आशंका है कि युवाओं का वैचारिक रूप से ब्रेनवॉश कर उन्हें सामाजिक अशांति फैलाने, हिंसक गतिविधियों और अन्य देशविरोधी कार्यों के लिए तैयार करने की कोशिश की जा रही थी। इस पूरे पहलू की जांच अभी जारी है।
अब तक छह गिरफ्तारियां, बिहार से भी आरोपी पकड़ा गया
मामले में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हाल ही में बिहार के मधुबनी जिले से इजहार-उल-हक को गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया, जहां अदालत ने उसे 20 जून तक एटीएस रिमांड पर भेज दिया।
जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की परतें खोलने के लिए लगातार पूछताछ कर रही हैं और विभिन्न राज्यों में संदिग्ध संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पूछताछ में सामने आए कई अहम सुराग
एटीएस सूत्रों के अनुसार, मोहम्मद फराज से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। जांच में दावा किया गया है कि वह मध्य प्रदेश के बाहर भी अपने संपर्कों का विस्तार करने की कोशिश कर रहा था। इसी क्रम में धार निवासी हाजी अहजर को भी गिरफ्तार किया गया है।
इसके अलावा हरियाणा के नूंह से एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एजेंसियों का कहना है कि वह कई महीनों से फराज के संपर्क में था। हालांकि उसकी औपचारिक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है।
विदेशी फंडिंग और डिजिटल नेटवर्क जांच के केंद्र में
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि आरोपियों तक किसी प्रकार की विदेशी फंडिंग पहुंच रही थी या नहीं। इसके साथ ही जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को विभिन्न समूहों से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। एटीएस अब उन लोगों की भी पहचान कर रही है, जो आरोपियों के संपर्क में रहे हैं।
डिजिटल गतिविधियों की हो रही गहन जांच
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां आरोपियों के सोशल मीडिया अकाउंट्स, डिजिटल नेटवर्क और कथित डार्क एप्स पर उनकी गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं। कुछ ऑनलाइन पोस्ट और विदेशी संपर्कों को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है।
हालांकि एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
पांच राज्यों तक पहुंचे जांच के तार
जांच में अब तक पांच राज्यों तक इस कथित नेटवर्क के संपर्क सामने आने का दावा किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ और संदिग्धों से पूछताछ या गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
फिलहाल नईम अब्दुल्ला, शाकिर और इजहार-उल-हक एटीएस रिमांड पर हैं। जांच एजेंसियां मोहम्मद फराज, नईम अब्दुल्ला, शाकिर मेव और इजहार-उल-हक को इस मामले की महत्वपूर्ण कड़ियों के रूप में देख रही हैं। पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है।



