
नई दिल्ली: श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर ज्येष्ठ पूर्णिमा का पावन पर्व आज 29 जून 2026, सोमवार को मनाया जा रहा है। इस बार की पूर्णिमा कई मायनों में बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि आज सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और मूल नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बना है। ज्योतिष और धर्म शास्त्रों के अनुसार ऐसे शुभ योगों में किए गए जप, तप, दान और पूजा-पाठ का फल कई गुना बढ़ जाता है।
पूर्णिमा तिथि का क्या है महत्व?
वैदिक पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 29 जून को सुबह 4 बजकर 2 मिनट से शुरू हो चुकी है और 30 जून की सुबह 5 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। चूंकि धार्मिक कार्यों में उदयातिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए आज के दिन स्नान, दान, व्रत और पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना गया है।
मानसिक शांति और समृद्धि का प्रतीक है ज्येष्ठ पूर्णिमा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा की तिथि पूर्णता, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती है। आज चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ विराजमान रहेगा, जिससे मानसिक शांति, सुख और समृद्धि की प्राप्ति का योग बनता है। सोमवार होने के कारण भगवान शिव की आराधना का महत्व भी कई गुना बढ़ गया है।
पुरी में निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य स्नान यात्रा
ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध स्नान यात्रा का आयोजन किया जाता है। परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को 108 पवित्र कलशों के जल से स्नान कराया जाता है। इस आयोजन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद विशेष माना जाता है।
सत्यनारायण कथा और चंद्रदेव पूजा का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। वहीं पूर्णिमा की रात चंद्रदेव को कच्चे दूध और गंगाजल से अर्घ्य अर्पित करने से मानसिक तनाव दूर होता है और चंद्र दोष से राहत मिलने की मान्यता है।
ऐसे करें ज्येष्ठ पूर्णिमा की पूजा
आज ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना गया है। यदि किसी पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें और माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाकर विधिवत पूजा करें। सोमवार होने के कारण शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बेलपत्र अर्पित करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।
दान-पुण्य से बढ़ेगा शुभ फल
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र, जल का पात्र और अन्य उपयोगी वस्तुएं दान की जा सकती हैं। गर्मी के मौसम को देखते हुए जल से भरा घड़ा, छाता, पंखा या गोशाला में हरी घास का दान करना भी पुण्यदायी माना गया है।
आज क्या करें और क्या नहीं?
आज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करें, जरूरतमंदों की सहायता करें और घर में भजन-कीर्तन या धार्मिक पाठ का आयोजन करें। वहीं किसी भी प्रकार के विवाद, झगड़े, झूठ और अपमानजनक व्यवहार से दूर रहें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मांसाहार, मदिरा और अन्य नशे से भी परहेज करना चाहिए।



