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सिख समुदाय पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप, राजनीतिक दल के नेता पर केस दर्ज; वीडियो की जांच में जुटी पुलिस

नाहन: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में सिख समुदाय के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में एक राजनीतिक संगठन के नेता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है और वायरल वीडियो की जांच की जा रही है।

शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ मामला

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, उत्तराखंड क्रांति दल के नेता आशीष नेगी के खिलाफ पोंटा साहिब निवासी परमजीत सिंह बंगा की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों और निहंगों के बीच हुए विवाद को लेकर की गई टिप्पणी से सिख समुदाय के एक वर्ग की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

पुलिस के अनुसार, नेगी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में कथित तौर पर कहा था कि “खालिस्तान आंदोलन उत्तराखंड में चलाया जा रहा है”, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया और शिकायत दर्ज कराई गई।

धार्मिक भावनाएं आहत करने से जुड़ा है मामला

भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 ऐसे कृत्यों से संबंधित है, जिनका उद्देश्य किसी वर्ग विशेष की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से आहत करना माना जाता है। यह प्रावधान पूर्व भारतीय दंड संहिता की धारा 295ए के समान माना जाता है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है। जांच एजेंसियां सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं।

आरोपों पर नेता की सफाई भी आई सामने

विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक अन्य वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आशीष नेगी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने दावा किया कि उनके वीडियो को तोड़-मरोड़कर और चुनिंदा हिस्सों में दिखाया जा रहा है ताकि सनसनी फैलाई जा सके और भ्रम की स्थिति पैदा हो।

उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया जिससे किसी समुदाय की भावनाएं आहत हों और उनके कथनों को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है।

निहंगों और स्थानीय लोगों के विवाद के बाद बढ़ा था मामला

यह पूरा विवाद उत्तराखंड के कर्णप्रयाग क्षेत्र में स्थानीय लोगों और निहंगों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद चर्चा में आया था। हाल ही में चमोली जिले से जुड़े इस मामले में स्थानीय अदालत ने चार निहंगों को जमानत प्रदान की थी।

बताया गया कि जमानत मिलने से पहले उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर 300 से अधिक निहंगों और पुलिस के बीच लगभग पांच दिनों तक गतिरोध की स्थिति बनी रही थी, जिसके बाद मामला शांत हुआ।

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