
रांची: झारखंड की राजधानी रांची के ग्रामीण क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। अनगड़ा थाना क्षेत्र के चंद्रटोली गांव में कुएं में गिरे छोटे भाई को बचाने के प्रयास में बड़े भाई ने भी छलांग लगा दी, लेकिन दोनों की जान नहीं बच सकी। इस हादसे में दो सगे भाइयों की मौत के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
सोमवार सुबह करीब छह बजे हुई इस घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। परिवार के दो सदस्यों की एक साथ मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
छोटे भाई को बचाने में गई बड़े भाई की जान
पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान 42 वर्षीय सुखराम मुंडा और 35 वर्षीय विनोद मुंडा के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक विनोद मुंडा कुएं में गिर गए थे। उन्हें बचाने के लिए बड़े भाई सुखराम मुंडा बिना किसी परवाह के तुरंत कुएं में उतर गए।
बताया जा रहा है कि बचाव के दौरान दोनों भाई गहरे पानी में फंस गए और बाहर नहीं निकल सके। देखते ही देखते दोनों की डूबने से मौत हो गई।
कुएं से पानी निकालते समय हुआ हादसा
ग्रामीणों के मुताबिक सुबह खेत की ओर जाने के दौरान विनोद मुंडा कुएं से पानी निकाल रहे थे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे सीधे कुएं में जा गिरे।
भाई को डूबता देख सुखराम ने तुरंत कुएं में छलांग लगा दी। ग्रामीणों का कहना है कि सुखराम ने काफी प्रयास कर विनोद को पानी की सतह तक खींच लिया था, लेकिन कुएं में पानी अधिक होने और बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं होने के कारण दोनों की जान चली गई।
ग्रामीणों ने निकाला बाहर, अस्पताल में हुई मौत की पुष्टि
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों ने दोनों भाइयों को कुएं से बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
मिर्गी की बीमारी से पीड़ित था छोटा भाई
थाना पुलिस के अनुसार विनोद मुंडा मिर्गी के मरीज बताए जा रहे थे। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं बीमारी के कारण उनका संतुलन तो नहीं बिगड़ा था।
मनरेगा से बने कुएं पर नहीं थी मुंडेर
हादसे के बाद जिस कुएं में दोनों भाइयों की जान गई, उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिंचाई कूप करीब दो वर्ष पहले मनरेगा योजना के तहत बनवाया गया था।
करीब 30 फीट गहरे इस कुएं में 22 से 23 फीट तक पानी भरा हुआ था, लेकिन सुरक्षा के लिए इसके चारों ओर मुंडेर या घेराबंदी नहीं की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि कुएं के चारों तरफ सुरक्षा दीवार बनी होती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
जानकारी के अनुसार विनोद मुंडा अविवाहित थे, जबकि सुखराम मुंडा अपने पीछे दो बेटे और एक बेटी छोड़ गए हैं। एक ही परिवार के दो भाइयों की मौत से गांव में शोक का माहौल है।
पूर्व मुखिया मधुसूदन मुंडा ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा और सरकारी सहायता देने की मांग की है।
लापरवाही पर उठे सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने मनरेगा के तहत निर्मित कुओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है। लोगों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में बने ऐसे कई कुएं बिना मुंडेर और सुरक्षा इंतजामों के खुले पड़े हैं, जो भविष्य में भी बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं।



