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MP High Court ने 350 करोड़ के स्कूल यूनिफॉर्म टेंडर पर लगाई रोक, राज्य सरकार से एक हफ्ते में मांगा जवाब

भोपाल: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के 52 लाख से अधिक विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म आपूर्ति से जुड़े करीब 350 करोड़ रुपये के टेंडर पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला निविदा प्रक्रिया में तय योग्यता शर्तों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान लिया गया। अदालत ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक संबंधित टेंडर को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा।

स्थानीय उद्योगों को बाहर करने का आरोप

यह याचिका जबलपुर अपैरल इनोवेशन एंड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (JAIMA) की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने टेंडर दस्तावेज में शामिल योग्यता संबंधी शर्तों को प्रतिबंधात्मक बताते हुए अदालत में चुनौती दी।

एसोसिएशन की ओर से पेश अधिवक्ता विमल कांत जैन ने अदालत को बताया कि मध्य प्रदेश टेक्स्टबुक कॉर्पोरेशन द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंड ऐसे हैं, जिनके कारण राज्य के स्थानीय उद्योग निविदा प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं।

इन शर्तों पर उठाए सवाल

याचिका में कहा गया है कि टेंडर में स्पिनिंग मिलों के लिए 700 करोड़ रुपये और गारमेंट निर्माताओं के लिए 233 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार, हर वर्ष 50 लाख यूनिफॉर्म तैयार करने की क्षमता तथा पिछले तीन वर्षों में 105 करोड़ रुपये के समान कार्य का अनुभव जैसी शर्तें रखी गई हैं।

याचिकाकर्ता का दावा है कि इन मानकों के कारण सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, पावरलूम इकाइयां, बुनकर, महिला स्व-सहायता समूह और छोटे उद्योग इस प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं।

MSME नियमों के उल्लंघन का आरोप

JAIMA के सचिव अजीत मोदी ने कहा कि यह शर्तें मध्य प्रदेश स्टोर परचेज एंड सर्विस प्रोक्योरमेंट रूल्स, 2023 की भावना के विपरीत हैं। उनका आरोप है कि ये नियम स्थानीय उद्योगों और MSME इकाइयों को समान अवसर देने के लिए बनाए गए थे, लेकिन मौजूदा शर्तों से राज्य के बाहर की कुछ बड़ी कंपनियों को लाभ मिलने की आशंका है।

MSME मंत्री ने भी जताया था संज्ञान लेने का भरोसा

इससे पहले MSME मंत्री चेतन कश्यप ने कहा था कि केंद्रीकृत खरीद प्रणाली का उद्देश्य उद्योगों और MSME कारोबारियों को सहयोग देना है। उन्होंने यह भी कहा था कि MSME व्यापारियों की ओर से उठाई गई चिंताओं पर सरकार विचार करेगी।

स्व-सहायता समूहों ने जताई थी चिंता

स्व-सहायता समूहों और MSME गारमेंट इकाइयों से जुड़े लोगों ने भी दावा किया था कि यूनिफॉर्म निर्माण का काम उनसे वापस लिए जाने से राज्यभर में हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

वहीं, स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह का कहना था कि नई केंद्रीकृत व्यवस्था का उद्देश्य सभी विद्यार्थियों को एक समान गुणवत्ता की यूनिफॉर्म समय पर उपलब्ध कराना है। उनके अनुसार, पहले महिला समूहों को समय पर आपूर्ति करने और कपड़े की गुणवत्ता बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 1.4 लाख से अधिक महिला स्व-सहायता समूह सदस्यों को यूनिफॉर्म की सिलाई और आपूर्ति प्रबंधन का प्रशिक्षण भारतीय प्रबंधन संस्थान, इंदौर द्वारा दिया गया था। इस पहल की शुरुआत वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में की गई थी।

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