
जोधपुर: राजस्थान की मंडोर ओपन जेल जल्द एक अनोखे विवाह समारोह की गवाह बनने जा रही है। हत्या के अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो बंदी आपसी सहमति से विवाह के बंधन में बंधेंगे। राजस्थान हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद जेल प्रशासन ने शादी की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
नागौर निवासी मूलाराम वर्ष 2017 से पड़ोसी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं और वर्तमान में मंडोर ओपन जेल में बंद हैं। वहीं सीमा अपने पति की हत्या के मामले में दोषी हैं और फिलहाल 40 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर हैं।
हाई कोर्ट ने दी विवाह की अनुमति
मूलाराम की ओर से राजस्थान हाई कोर्ट में अस्थायी सजा निलंबन की याचिका दायर की गई थी। न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मूलाराम और सीमा दोनों अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं।
मूलाराम के अधिवक्ता कालूराम भाटी ने अदालत में दलील दी कि यह विवाह दोनों के पुनर्वास और सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उनका कहना था कि विवाह के बाद दोनों सामान्य पारिवारिक जीवन की ओर बढ़ सकेंगे। याचिका में बंदियों के वैवाहिक और संतानोत्पत्ति संबंधी अधिकारों पर हाई कोर्ट के पूर्व निर्णय का भी हवाला दिया गया।
सरकार ने भी नहीं किया विरोध
राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश रिपोर्ट में भी दोनों की विवाह की इच्छा की पुष्टि की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दोनों पहले लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुके हैं। लोक अभियोजकों ने अदालत को बताया कि ओपन जेल के नियमों के तहत यदि दोनों विवाह करना चाहते हैं तो सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
जेल परिसर में ही होगा विवाह समारोह
अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि विवाह समाज की एक महत्वपूर्ण संस्था है और केवल दोष सिद्ध होने के आधार पर किसी बंदी को उसकी सहमति से विवाह करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने विवाह की अनुमति देते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए।
कोर्ट के आदेश के अनुसार, विवाह समारोह मंडोर ओपन जेल परिसर में आयोजित किया जाएगा। दोनों पक्षों की ओर से अधिकतम 21-21 लोगों को शामिल होने की अनुमति होगी। विवाह संपन्न कराने के लिए एक पंडित भी मौजूद रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर मेहमानों की संख्या बढ़ाने का निर्णय जेल प्रशासन ले सकेगा।
अदालत ने निर्देश दिया है कि विवाह की तिथि की सूचना पहले से जेल प्रशासन को दी जाए। शादी का पूरा खर्च मूलाराम वहन करेंगे। अधिवक्ता कालूराम भाटी के अनुसार, विवाह समारोह 22 जुलाई को आयोजित किया जा सकता है।



