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3 मिनट में लोकसभा से पास हुआ जन्म-मृत्यु संशोधन विधेयक, विपक्ष के हंगामे के बीच बिना बहस मिली मंजूरी

नई दिल्ली: लोकसभा में शुक्रवार को विपक्ष के हंगामे के बीच जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक महज तीन मिनट में ध्वनिमत से पारित हो गया। विधेयक पर न कोई चर्चा हुई और न ही बहस। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे पर संसदीय परंपराओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। इससे एक दिन पहले राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम को राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण और दर्जा देने वाला विधेयक भी बिना चर्चा के केवल पांच मिनट में पारित किया गया था।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष के शोर-शराबे के बीच विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव रखा। कार्यवाही का संचालन कर रहे पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने चर्चा के लिए क्रमवार सदस्यों के नाम पुकारे, लेकिन न सत्ता पक्ष की ओर से और न ही विपक्ष की ओर से किसी सदस्य ने चर्चा में हिस्सा लिया। इसके बाद सदन ने महज तीन मिनट में ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी।

दो साल से अधिक देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश होगा अनिवार्य

विधेयक के अनुसार जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद पंजीकरण कराने के लिए अब प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा। वर्तमान व्यवस्था में एक वर्ष से अधिक देरी होने पर जिला मजिस्ट्रेट, उप मंडल मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण कराया जा सकता था।

बिना चर्चा विधेयक पारित होने पर पहले भी जता चुका है सुप्रीम कोर्ट चिंता

संसद में बिना चर्चा विधेयक पारित करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट पहले भी चिंता व्यक्त कर चुका है। ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक 2021 को पर्याप्त चर्चा के बिना पारित किए जाने पर तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश एन.वी. रमन्ना ने कहा था कि बहस के अभाव में विधेयकों की कमियां सामने नहीं आ पातीं। उन्होंने यह भी कहा था कि कानून में स्पष्टता और पर्याप्त प्रावधान नहीं होने से प्रभावित लोगों को अदालतों का रुख करना पड़ता है, जिससे मुकदमों का बोझ बढ़ता है।

राज्यसभा में लगातार दसवें दिन भी नहीं चल सकी कार्यवाही

उधर, राज्यसभा में जारी गतिरोध शुक्रवार को भी खत्म नहीं हुआ। लगातार दसवें दिन हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। सभापति ने व्यवधान जारी रहने पर सदन की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

कार्यवाही के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर सड़क छाप राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं, शून्यकाल शुरू होने के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने नियम 267 के तहत दिए गए अपने नोटिस पर चर्चा कराने की मांग उठाई। इस पर सभापति ने स्पष्ट किया कि उनका नोटिस अस्वीकार कर दिया गया है।

बिना चर्चा विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष कार्य मंत्रणा समिति में विधेयकों के कार्यक्रम का समर्थन करता है, लेकिन सदन में हंगामा करता है, जिससे सरकार बिना चर्चा विधेयक पारित कराने के लिए मजबूर होती है।

वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि विपक्ष कभी नहीं चाहता कि कोई विधेयक बिना चर्चा के पारित हो। उन्होंने सवाल उठाया कि गृह मंत्री सदन में क्यों नहीं आते और कहा कि सरकार ने बिना बहस विधायी कार्य पूरे करने की आदत बना ली है।

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