स्वास्थ्य

क्या सलाद खाने से फैल सकता है साइक्लोस्पोरियासिस? जानिए दूषित भोजन से होने वाले संक्रमण में डिहाइड्रेशन का खतरा

नई दिल्ली। हरी पत्तेदार सब्जियां और सलाद स्वस्थ खानपान का अहम हिस्सा माने जाते हैं, लेकिन इन्हें खाने से पहले साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। अमेरिका के मिशिगन में साइक्लोस्पोरा संक्रमण के प्रकोप से दो लोगों की मौत की खबर सामने आने के बाद इस संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ी है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, दोनों मृतकों को पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं और आंतों की बीमारी के साथ डिहाइड्रेशन ने उनकी स्थिति को गंभीर बनाने में भूमिका निभाई।

साइक्लोस्पोरियासिस आंतों में होने वाला संक्रमण है, जो साइक्लोस्पोरा नामक सूक्ष्म परजीवी के कारण होता है। यह दूषित भोजन या पानी के जरिए शरीर में पहुंच सकता है। सामान्य तौर पर यह संक्रमण जानलेवा नहीं होता, लेकिन लगातार दस्त होने पर शरीर से बड़ी मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स निकल सकते हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने पर डिहाइड्रेशन गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

मिशिगन में लेट्यूस को माना गया संभावित स्रोत

मिशिगन में सामने आए प्रकोप की जांच के दौरान मैक्सिको से सप्लाई किए गए आइसबर्ग लेट्यूस को संभावित संक्रमण स्रोत माना गया। हालांकि, जांच में लेट्यूस के एक नमूने में साइक्लोस्पोरा पाए जाने की शुरुआती प्रयोगशाला रिपोर्ट बाद में फॉल्स पॉजिटिव निकली। इसके बावजूद महामारी विज्ञान से जुड़े उपलब्ध साक्ष्य उसी आपूर्ति श्रृंखला की ओर संकेत करते रहे।

साइक्लोस्पोरा से दूषित भोजन या पानी के जरिए संक्रमण फैल सकता है। दूषित पानी का इस्तेमाल फलों और सब्जियों को उगाने, धोने या तैयार करने में होने पर भी संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। लेट्यूस का इस्तेमाल सलाद के अलावा बर्गर, सैंडविच और रैप्स में भी किया जाता है, इसलिए कच्चे लेट्यूस के सेवन में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

बार-बार पानी जैसे दस्त प्रमुख लक्षण

साइक्लोस्पोरियासिस का सबसे प्रमुख लक्षण बार-बार पानी जैसे दस्त होना है। इसके अलावा पेट में दर्द या ऐंठन, मतली, भूख कम लगना, थकान, वजन कम होना और शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है और लक्षण कुछ समय कम होने के बाद दोबारा भी दिखाई दे सकते हैं।

जिन लोगों को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, उनमें यह संक्रमण अधिक गंभीर रूप ले सकता है। लगातार दस्त के कारण शरीर में कमजोरी बढ़ने के साथ इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी बिगड़ सकता है। ऐसे लक्षणों में समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

मानसून में दूषित भोजन-पानी से बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा

भारत में भी मानसून के दौरान दूषित पानी और भोजन की खराब स्वच्छता के कारण कई तरह के आंतों के संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, अमेरिका में सामने आए इस विशेष प्रकोप को भारत में संक्रमण फैलने का संकेत नहीं माना जा सकता। लोगों को घबराने के बजाय ताजी सब्जियों और सलाद की साफ-सफाई पर ध्यान देना चाहिए।

लेट्यूस और अन्य पत्तेदार सब्जियों को खाने से पहले साफ बहते पानी में अच्छी तरह धोना चाहिए। खराब या गंदी पत्तियों को अलग कर देना बेहतर है। भोजन तैयार करने से पहले और बाद में साबुन से हाथ अच्छी तरह धोने से भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। सब्जियों की सफाई के लिए साबुन, डिटर्जेंट या किसी अन्य रसायन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

डिहाइड्रेशन के इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

लगातार दस्त के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, मुंह सूखना या पेशाब कम होना डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

सिर्फ साइक्लोस्पोरियासिस के डर से सलाद या ताजी सब्जियों का सेवन बंद करने की जरूरत नहीं है। सही सफाई, सुरक्षित पानी और स्वच्छ भोजन की आदतें संक्रमण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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