मेलबर्न के पेटिंग जू में खतरनाक बैक्टीरिया का कहर, 2 बच्चे अस्पताल में भर्ती; 3 साल के मासूम को स्थायी ब्रेन डैमेज

मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में एक पेटिंग जू में जानवरों के संपर्क में आने के बाद दो बच्चों के गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण की चपेट में आने का मामला सामने आया है। दोनों बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें एक तीन वर्षीय बच्चे के मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंचा है और उसकी किडनी भी फेल हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विक्टोरिया के स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण के संभावित प्रसार की जांच शुरू कर दी है।
तीन साल के बच्चे को मस्तिष्क और किडनी को गंभीर नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रमित तीन वर्षीय बच्चे का पिछले चार सप्ताह से मोनाश चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। संक्रमण के कारण उसके मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंचा है, जबकि उसकी किडनी भी काम करना बंद कर चुकी है। बच्चे को भविष्य में किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ सकती है।
इसी पेटिंग जू में गया दो वर्षीय बच्चा नूह भी संक्रमण की चपेट में आ गया। उसकी हालत इतनी गंभीर हो गई कि उसे करीब तीन सप्ताह तक गहन चिकित्सा कक्ष में रखा गया। नूह की मां ब्रुक स्नूक्स के मुताबिक, शुरुआत में बच्चे को सामान्य दस्त और पेट खराब होने की शिकायत हुई थी। शुरुआती लक्षणों से बीमारी की गंभीरता का अंदाजा लगाना मुश्किल था।
क्या है STEC संक्रमण और कैसे फैलता है?
जांच में बच्चों के शिगा टॉक्सिन-उत्पादक एशचेरिचिया कोलाई यानी STEC से संक्रमित होने की बात सामने आई है। यह संक्रमण पेट और किडनी पर गंभीर असर डाल सकता है। यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से गायों जैसे जानवरों की आंत और मल में पाया जाता है।
STEC संक्रमण के प्रमुख लक्षणों में दस्त, पेट में मरोड़, मतली और उल्टी शामिल हैं। ये लक्षण आमतौर पर संक्रमण के तीन से चार दिन बाद सामने आ सकते हैं।
यह संक्रमण संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क, दूषित पानी में तैरने अथवा दूषित भोजन और पेय पदार्थों के सेवन से फैल सकता है। संक्रमित बच्चे करीब तीन सप्ताह तक, जबकि वयस्क लगभग एक सप्ताह तक संक्रमण फैलाने में सक्षम हो सकते हैं।
संक्रमण से हो सकती है जानलेवा HUS बीमारी
चिकित्सकों के मुताबिक STEC संक्रमण कुछ मामलों में हीमोलिटिक यूरीमिक सिंड्रोम यानी HUS का कारण बन सकता है। यह गंभीर स्थिति लाल रक्त कोशिकाओं और किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इसके गंभीर रूप लेने का खतरा अधिक बताया गया है।
इस संक्रमण से बचाव के लिए फिलहाल कोई टीका उपलब्ध नहीं है। ऐसे में स्वच्छता और संक्रमण से बचाव के उपायों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने माता-पिता को किया सतर्क
मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी कैरोलीन मैकएल्ने ने माता-पिता से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने संक्रमण से बचने के लिए हाथों की अच्छी तरह सफाई को सबसे प्रभावी उपायों में से एक बताया।
बच्चों को शौचालय के इस्तेमाल के बाद और जानवरों के संपर्क में आने के बाद साबुन और पानी से अच्छी तरह हाथ धोने की आदत डालने की सलाह दी गई है। पेटिंग जू जैसे स्थानों पर जानवरों को छूने के बाद हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है।



