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तीस्ता विवाद पर बांग्लादेश का बड़ा बयान, चीन की परियोजना के बीच कहा- भारत से रिश्ते खराब नहीं करना चाहते

ढाका: तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से जारी विवाद के बीच बांग्लादेश ने भारत के साथ अपने संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने कहा कि उनका देश तीस्ता जल बंटवारा मुद्दे के कारण भारत के साथ अपने मैत्रीपूर्ण संबंध खराब नहीं करना चाहता। उन्होंने भारत से अपील की कि वह अपने हितों के साथ-साथ बांग्लादेश के हितों को भी ध्यान में रखे।

‘दोनों देशों के हितों का ध्यान रखना जरूरी’

जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने टीबीएसन्यूज डॉट नेट की ओर से आयोजित एक संगोष्ठी में कहा कि भारत बांग्लादेश का पड़ोसी और मित्र देश है। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत के अपने हित हैं, उसी तरह बांग्लादेश के भी हित हैं। उनके मुताबिक, एक मित्र देश को दूसरे मित्र देश के हितों का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश भारत के साथ अपने मैत्रीपूर्ण संबंधों को खराब नहीं करना चाहता।

मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब ढाका ने तीस्ता नदी से जुड़े मुद्दे के समाधान के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। इनमें चीन के सहयोग से प्रस्तावित तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना भी शामिल है।

चीन के सहयोग वाली परियोजना पर बढ़ा जोर

बांग्लादेश तीस्ता परियोजना के जरिए देश के उत्तरी हिस्से में बार-बार आने वाली बाढ़, नदी कटाव और सूखे के मौसम में पानी की कमी जैसी समस्याओं का समाधान करना चाहता है। मंत्री ने बताया कि फरवरी में हुए चुनाव के बाद सरकार ने इस परियोजना को लेकर विशेषज्ञों की राय जानने के लिए कई संगोष्ठियां और विचार-विमर्श किए हैं।

इन चर्चाओं से मिले सुझावों के आधार पर विस्तृत अध्ययन तैयार किया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस अध्ययन से परियोजना के संबंध में आगे ठोस कदम उठाने में मदद मिलेगी। संगोष्ठी का आयोजन जल संसाधन मंत्रालय और बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ने संयुक्त रूप से किया था।

उत्तर बांग्लादेश के लाखों लोगों को परियोजना से उम्मीद

मंत्री ने कहा कि तीस्ता परियोजना बड़ी चुनौती है, लेकिन उत्तर बांग्लादेश के पांच से छह जिलों के लोगों को इससे काफी उम्मीदें हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोग वर्षों से नदी कटाव और पानी से जुड़ी दूसरी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि परियोजना लागू नहीं हुई तो प्रभावित परिवारों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि तीस्ता से जुड़ी समस्या का स्थायी समाधान अब जरूरी हो गया है।

दशकों से अटका है तीस्ता जल बंटवारा समझौता

तीस्ता नदी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश पहुंचती है। आगे जाकर यह जमुना नदी में मिलती है, जिसे बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र के नाम से जाना जाता है। उत्तरी बांग्लादेश में कृषि और लोगों की आजीविका के लिए तीस्ता बेहद महत्वपूर्ण है, जबकि पश्चिम बंगाल में सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिहाज से भी इसका महत्व है।

भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता के पानी के बंटवारे को लेकर 1980 के दशक से बातचीत होती रही है। 1983 के अंतरिम समझौते में भारत के लिए 39 प्रतिशत और बांग्लादेश के लिए 36 प्रतिशत पानी का प्रावधान किया गया था, जबकि 25 प्रतिशत पानी आवंटित नहीं किया गया था। इसके बाद भी स्थायी समझौते की दिशा में बातचीत जारी रही।

2011 में सूखे के मौसम में पानी के बंटवारे को लेकर एक अंतरिम समझौते का मसौदा तैयार हुआ था, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार के विरोध के कारण उस पर हस्ताक्षर नहीं हो सके। राज्य सरकार को आशंका थी कि समझौते से पश्चिम बंगाल में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

चीन की एंट्री ने बढ़ाया रणनीतिक महत्व

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान तीस्ता परियोजना की प्रगति की नियमित समीक्षा कर रहे हैं। मंत्री के मुताबिक, परियोजना को लागू करने के लिए जिस भी समझौते या व्यवस्था की जरूरत होगी, सरकार उस दिशा में आगे बढ़ेगी।

जून में चीन की आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने चीनी नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बातचीत की थी। इस दौरान बीजिंग ने विवादित तीस्ता बहाली परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता का अध्ययन जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई थी। चीन के सहयोग से परियोजना को आगे बढ़ाने के बांग्लादेश के फैसले ने तीस्ता विवाद को केवल जल बंटवारे के मुद्दे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया है।

सिलीगुड़ी गलियारे की नजदीकी से भारत की चिंता बढ़ी

उत्तरी बांग्लादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी भारत के लिए संवेदनशील विषय है। यह इलाका सिलीगुड़ी गलियारे के करीब है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण भू-भाग है।

भारत का रुख है कि तीस्ता मुद्दे का समाधान पश्चिम बंगाल समेत सभी संबंधित पक्षों से बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जुलाई में कहा था कि प्रस्तावित तीस्ता नदी परियोजना को लेकर भारत का पक्ष बांग्लादेश को पहले ही बता दिया गया है। उन्होंने कहा था कि भारत तीस्ता मुद्दे पर अपने समग्र दृष्टिकोण में इससे जुड़े सभी घटनाक्रमों को ध्यान में रखेगा।

गंगा जल समझौते से अलग है तीस्ता विवाद

तीस्ता का पानी बांटने का मुद्दा भारत-बांग्लादेश के बीच हुए गंगा जल बंटवारा समझौते से अलग है। दोनों देशों ने 1996 में गंगा जल बंटवारे को लेकर 30 वर्ष का समझौता किया था, जिसकी अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है।

भारत और बांग्लादेश की सीमाओं से होकर 54 नदियां गुजरती हैं। दोनों देशों के बीच जल संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए संयुक्त नदी आयोग के माध्यम से बातचीत की जाती है।

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