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बिहार में यूट्यूबर्स की बढ़ेगी कमाई, सरकार ने विज्ञापन के नियम किए आसान; छोटे चैनलों को भी मिलेगा फायदा

पटना। बिहार सरकार ने सोशल मीडिया पर सरकारी विज्ञापनों से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत अब विज्ञापन का भुगतान पाने के लिए वीडियो पर न्यूनतम व्यूज की पुरानी शर्त हटा दी गई है। इसके अलावा कम फॉलोअर और सब्सक्राइबर वाले सोशल मीडिया चैनलों को अतिरिक्त व्यूज के आधार पर भुगतान हासिल करने के लिए भी बड़ी राहत दी गई है। इस फैसले से छोटे यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया हैंडल संचालित करने वाले लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

क्या बदला है सोशल मीडिया विज्ञापन के नियमों में?

बिहार सरकार ने सोशल मीडिया विज्ञापन नियमों में बदलाव करते हुए वीडियो विज्ञापन के भुगतान से जुड़ी व्यूज की अनिवार्य शर्त समाप्त कर दी है। पहले किसी वीडियो विज्ञापन पर चैनल के कुल फॉलोअर या सब्सक्राइबर के कम से कम 10 प्रतिशत व्यूज आने के बाद ही भुगतान किया जा सकता था। अब यह बाध्यता हटा दी गई है।

इसके साथ ही वीडियो अपलोड होने के 30 दिन बाद मिलने वाले अतिरिक्त व्यूज के आधार पर अतिरिक्त भुगतान के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब छोटे चैनलों और हैंडल को बड़े चैनलों के बराबर व्यूज की बाध्यता पूरी नहीं करनी होगी।

चार श्रेणियों में बांटे गए हैं सोशल मीडिया चैनल

बिहार सरकार ने फॉलोअर और सब्सक्राइबर की संख्या के आधार पर सोशल मीडिया चैनलों और हैंडल को चार श्रेणियों में बांटा है। 10 लाख से अधिक फॉलोअर या सब्सक्राइबर वाले चैनल ए श्रेणी में आते हैं। 5 लाख से 10 लाख तक वाले बी, 2 लाख से 5 लाख तक वाले सी और 1 लाख से 2 लाख तक वाले चैनल डी श्रेणी में रखे गए हैं।

सूचीबद्ध होने के लिए पिछले छह महीनों के दौरान हर महीने मूल वीडियो या पोस्ट की न्यूनतम संख्या से जुड़ी शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी। इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

कितना भुगतान करती है बिहार सरकार?

बिहार सरकार सोशल मीडिया चैनलों और हैंडल को विज्ञापन की अवधि और श्रेणी के आधार पर भुगतान करती है। 90 सेकंड तक के विज्ञापन को केवल पोस्ट करने के लिए अलग-अलग श्रेणियों में 20 हजार से 50 हजार रुपये तक दिए जाते हैं। वहीं विज्ञापन तैयार करने के साथ पोस्ट करने पर यह रकम 50 हजार से 80 हजार रुपये तक हो सकती है।

90 सेकंड से अधिक अवधि वाले विज्ञापनों के लिए केवल पोस्ट करने पर 50 हजार से 80 हजार रुपये तक और विज्ञापन तैयार करने के साथ 60 हजार से 1 लाख रुपये तक भुगतान का प्रावधान है। इन नियमों में वीडियो के अलावा ऑडियो, रील और पॉडकास्ट भी शामिल हैं।

छोटे चैनलों को अतिरिक्त कमाई के लिए बड़ी राहत

नए नियमों में 30 दिन बाद मिलने वाले अतिरिक्त व्यूज के लिए अलग-अलग श्रेणियों के चैनलों को अलग लक्ष्य दिया गया है। 90 सेकंड तक के वीडियो, रील या पॉडकास्ट के मामले में ए श्रेणी को 1 लाख अतिरिक्त व्यूज, बी श्रेणी को 40 हजार, सी श्रेणी को 20 हजार और डी श्रेणी को 10 हजार अतिरिक्त व्यूज मिलने पर 10 हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा।

90 सेकंड से अधिक अवधि वाले वीडियो में भी अतिरिक्त भुगतान के लिए श्रेणी के अनुसार व्यूज की सीमा तय की गई है। इस बदलाव का मकसद अलग-अलग आकार वाले सोशल मीडिया चैनलों के बीच व्यूज की असमानता को ध्यान में रखना है।

सरकार गैर-सूचीबद्ध चैनलों को भी दे सकेगी विज्ञापन

नए नियमों में एक और अहम बदलाव किया गया है। जरूरत और परिस्थितियों को देखते हुए बिहार सरकार ऐसे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, हैंडल या चैनलों को भी मौजूदा दरों पर सरकारी विज्ञापन दे सकती है, जो सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की सूची में शामिल नहीं हैं।

सरकार हर छह महीने में सूचीबद्ध सोशल मीडिया चैनलों और हैंडल के फॉलोअर या सब्सक्राइबर की संख्या की समीक्षा करेगी। अगर किसी चैनल के फॉलोअर कम होते हैं तो भविष्य में उसके विज्ञापन की दर नई श्रेणी के आधार पर तय की जा सकती है।

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