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23 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी, भूलकर भी न करें ये 5 काम, धार्मिक मान्यताओं में बताया गया है अशुभ

नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 की रात 2 बजे से शुरू होगी और 24 अगस्त की सुबह 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत और पूजन 23 अगस्त को किया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की पूजा का भी विधान बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन कुछ कार्यों से बचना चाहिए।

कब है सावन पुत्रदा एकादशी?

सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 23 अगस्त की रात 2 बजे से शुरू होगी। इसका समापन 24 अगस्त को सुबह 4 बजकर 18 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर 23 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी।

चावल का सेवन न करें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुत्रदा एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन चावल खाने को धार्मिक रूप से निषिद्ध माना जाता है और इससे दोष लगने की मान्यता है।

तुलसी की पत्तियां न तोड़ें

सावन पुत्रदा एकादशी के दिन तुलसी की पत्तियों को तोड़ने और उन्हें स्पर्श करने से बचने की धार्मिक मान्यता है। तुलसी को भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना जाता है और भगवान को भोग अर्पित करते समय तुलसी दल का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन तुलसी की पत्तियां तोड़ने से माता लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं।

काले कपड़े पहनने से बचें

धार्मिक मान्यताओं में पूजा-पाठ और शुभ अवसरों पर काले रंग के वस्त्र पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। सावन पुत्रदा एकादशी के दिन भी काले कपड़े न पहनने की मान्यता है। इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।

तामसिक भोजन और मदिरा से रहें दूर

सावन पुत्रदा एकादशी के दिन मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। व्रत और पूजा के दौरान सात्विक आहार का पालन करने की परंपरा बताई गई है।

गुस्सा और विवाद करने से बचें

एकादशी के दिन क्रोध करने और किसी के साथ विवाद करने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए। किसी का अपमान करने या उसका मजाक उड़ाने से भी बचना चाहिए। पूजा-पाठ के इस दिन शांत मन रखने और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव बनाए रखने की मान्यता है।

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