झारखंड में न्यूनतम मजदूरी के नए नियम का मसौदा, 4 सदस्यीय परिवार से 2700 कैलोरी और 66 मीटर कपड़े तक के मानक तय

रांची: झारखंड में न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए नए मानक तैयार किए गए हैं। प्रस्तावित नियमों में चार सदस्यों वाले मानक श्रमिक परिवार, प्रतिदिन प्रति उपभोग इकाई 2700 कैलोरी भोजन और प्रति परिवार सालाना 66 मीटर कपड़े की जरूरत को आधार बनाया गया है। श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग ने मजदूरी संहिता (झारखंड) नियमावली-2026 का प्रारूप जारी किया है।
चार श्रमिक नियमावलियों का प्रारूप जारी
विभाग ने मजदूरी संहिता के साथ औद्योगिक संबंध (झारखंड) नियमावली-2026, सामाजिक सुरक्षा (झारखंड) नियमावली-2026 और ऑक्युपेशनल सेफ्टी हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन (झारखंड) रूल्स-2025 का भी प्रारूप जारी किया है। इन चारों प्रस्तावित नियमावलियों पर आम लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। सुझाव श्रम आयुक्त कार्यालय की अधिकृत ईमेल के माध्यम से भेजे जा सकते हैं।
चार सदस्यीय परिवार को माना गया आधार
प्रस्तावित नियमावली के मुताबिक न्यूनतम मजदूरी की गणना के लिए एक मानक श्रमिक परिवार को आधार बनाया जाएगा। इसमें कमाने वाला श्रमिक, उसका पति या पत्नी और दो बच्चे शामिल होंगे। इस परिवार को तीन वयस्क उपभोग इकाइयों के बराबर माना गया है।
न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए रोजाना प्रति उपभोग इकाई 2700 कैलोरी की भोजन जरूरत और एक मानक परिवार के लिए सालाना 66 मीटर कपड़े की जरूरत को भी गणना में शामिल किया गया है।
मजदूरी तय करने में इन खर्चों का भी हिसाब
प्रस्तावित मानकों के तहत आवास का किराया भोजन और कपड़े पर होने वाले खर्च का 10 प्रतिशत माना जाएगा। ईंधन, बिजली और अन्य मदों के लिए न्यूनतम मजदूरी का 20 प्रतिशत तथा बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन और अन्य आकस्मिक जरूरतों के लिए न्यूनतम मजदूरी का 25 प्रतिशत निर्धारित करने का प्रावधान रखा गया है।
आठ घंटे काम और एक घंटे विश्राम का प्रावधान
नियमावली के प्रारूप में सामान्य कार्य दिवस के दौरान आठ घंटे काम और अधिकतम एक घंटे के विश्राम का प्रावधान है। किसी दिन काम की अवधि 12 घंटे और एक सप्ताह में कुल काम 48 घंटे से अधिक नहीं होगा। कृषि क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कार्य अवधि केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर तय की जाएगी।
हर कर्मचारी को सप्ताह में कम से कम एक दिन अवकाश देना होगा। सामान्य तौर पर यह अवकाश रविवार को होगा, हालांकि नियोक्ता किसी अन्य दिन को भी साप्ताहिक अवकाश के लिए निर्धारित कर सकता है। कर्मचारी से लगातार 10 दिन से अधिक बिना अवकाश काम नहीं कराया जा सकेगा।
न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए बनेगी तकनीकी समिति
न्यूनतम मजदूरी की दर निर्धारित करने और श्रमिकों के कौशल वर्गीकरण को लेकर राज्य सरकार को सलाह देने के लिए तकनीकी समिति गठित की जाएगी। श्रमायुक्त इसके अध्यक्ष और निदेशक, न्यूनतम मजदूरी इसके संयोजक होंगे। समिति में मुख्य कारखाना निरीक्षक के अलावा ग्रामीण विकास, जल संसाधन और लोक निर्माण विभाग के नामित प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
इसके अलावा शिक्षा क्षेत्र और गैर सरकारी संगठनों से दो प्रतिनिधि तथा आठ-आठ नियोजक और श्रमिक प्रतिनिधियों को सदस्य बनाए जाने का प्रावधान है।
मजदूरी से कटौती पर भी तय किए गए नियम
प्रस्तावित नियमों में मजदूरी से होने वाली कटौती की सीमा भी निर्धारित की गई है। यदि किसी कर्मचारी की कुल अधिकृत कटौती 50 प्रतिशत से ज्यादा हो जाती है तो अतिरिक्त राशि की वसूली अगले महीनों में किस्तों के माध्यम से की जाएगी। किसी एक महीने में वसूली कर्मचारी की उस महीने की मजदूरी के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
किसी सामान को नुकसान पहुंचने के आधार पर मजदूरी में कटौती करने से पहले कर्मचारी को लिखित सूचना देकर अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने का अवसर देना होगा।
बोनस भुगतान की गणना का तरीका भी तय होगा
प्रस्तावित नियमावली में बोनस से संबंधित मामलों की गणना की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। इसके लिए राज्य सलाहकार बोर्ड गठित करने का प्रावधान है। श्रम विभाग के सचिव या प्रधान सचिव की अध्यक्षता वाले इस बोर्ड में कुल 11 सदस्य होंगे।
बोर्ड में विधानसभा के दो सदस्य, श्रमायुक्त सदस्य सचिव और निदेशक, न्यूनतम मजदूरी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। ग्रामीण विकास, जल संसाधन, लोक निर्माण और नगर विकास विभाग से एक-एक नामित प्रतिनिधि भी सदस्य होंगे। इसके अलावा औद्योगिक न्यायाधिकरण के पीठासीन पदाधिकारी रह चुके एक सदस्य, मजदूरी और श्रम क्षेत्र के अनुभव वाले दो सदस्य तथा शिक्षा और गैर सरकारी संगठनों से दो नामित प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।



