झारखण्डराज्य

माइनिंग रोकने की कोशिश पर हेमंत सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, धनबाद में जारी रहेगी BCCL की खुदाई

धनबाद: धनबाद के जामाडीह मौजा में 141.50 एकड़ जमीन को संरक्षित वन भूमि बताते हुए माइनिंग पर रोक लगाने के मामले में झारखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें नवंबर 2024 के झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने भारत कोकिंग कोल लिमिटेड यानी बीसीसीएल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए माइनिंग रोकने से जुड़े राज्य सरकार के दोनों आदेश रद्द कर दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने राज्य सरकार की याचिका में कोई मेरिट नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया। इसके साथ ही जामाडीह मौजा की विवादित जमीन पर बीसीसीएल की माइनिंग गतिविधियों को लेकर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने की राज्य सरकार की कोशिश को झटका लगा है।

2010 में शुरू हुआ था विवाद

इस मामले को लेकर झारखंड सरकार और बीसीसीएल के बीच कानूनी विवाद वर्ष 2010 में शुरू हुआ था। राज्य सरकार ने 25 अगस्त 2010 को आदेश जारी कर जामाडीह मौजा की 141.50 एकड़ जमीन पर माइनिंग बंद करने का निर्देश दिया था। सरकार का तर्क था कि यह जमीन संरक्षित वन भूमि है और आवश्यक अनुमति के बिना यहां माइनिंग की जा रही है।

इसके बाद राज्य सरकार ने 17 अगस्त 2016 को संशोधित आदेश जारी किया। इस आदेश में प्लॉट नंबर 437, 230 और 419 को वन भूमि के दायरे से बाहर कर दिया गया था। बीसीसीएल ने दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं।

बीसीसीएल ने कहा- पहले से हो रही थी माइनिंग

बीसीसीएल की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई थी कि विवादित जमीन पहले बंगाल कोल कंपनी के अधीन थी। कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के बाद यह जमीन केंद्र सरकार और कोयला मंत्रालय के अधीन आ गई। कंपनी के मुताबिक, इस जमीन पर पहले से ही माइनिंग गतिविधियां चल रही थीं और वर्तमान में बीसीसीएल यहां खनन कर रही है।

कंपनी ने तर्क दिया था कि जिस जमीन पर पहले से माइनिंग होती रही है, उसे अचानक संरक्षित वन भूमि बताते हुए खनन रोकने का आदेश देना उचित नहीं है। इसी आधार पर बीसीसीएल ने राज्य सरकार के दोनों आदेशों को चुनौती दी थी।

राज्य सरकार ने वन कानून का दिया था हवाला

वहीं झारखंड सरकार ने भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 29(3) का हवाला देते हुए कहा था कि संबंधित जमीन को संरक्षित वन के रूप में घोषित किया गया है। सरकार का पक्ष था कि आवश्यक अनुमति के बिना वहां माइनिंग करना कानून के खिलाफ है। राज्य सरकार की ओर से बीसीसीएल के प्रबंध निदेशक के खिलाफ कार्रवाई के लिए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था।

हाईकोर्ट ने बीसीसीएल के पक्ष में दिया था फैसला

नवंबर 2024 में झारखंड हाईकोर्ट ने बीसीसीएल के पक्ष में फैसला सुनाया था। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से माइनिंग रोकने के संबंध में जारी दोनों आदेशों को रद्द कर दिया था। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन अब शीर्ष अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी है। इससे जामाडीह मौजा में बीसीसीएल की माइनिंग गतिविधियां जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।

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