अद्धयात्मस्वास्थ्य

हरतालिका तीज पर सुहागिनें रखेंगी निर्जला व्रत, लेकिन भूलकर भी न करें ये गलतियां; वरना पड़ सकती है परेशानी

नई दिल्ली: हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं और माता पार्वती तथा भगवान शिव की पूजा करती हैं। कई महिलाएं इस दौरान निर्जला व्रत रखती हैं, जिसमें पूरे दिन पानी और भोजन का सेवन नहीं किया जाता। ऐसे में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ शरीर का ध्यान रखना भी जरूरी हो जाता है।

तीज के व्रत को लेकर अलग-अलग परिवारों में अलग परंपराएं हैं। कुछ महिलाएं पूरे दिन निर्जला रहती हैं, जबकि कुछ अपनी स्वास्थ्य स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार करती हैं। परेशानी तब बढ़ सकती है जब व्रत के दौरान शरीर के संकेतों को नजरअंदाज किया जाए या लंबे समय तक कुछ न खाने के बाद व्रत खोलते ही अधिक भोजन कर लिया जाए।

व्रत से एक दिन पहले पानी पीना अचानक कम न करें

निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं को व्रत से एक दिन पहले अचानक पानी या अन्य तरल पदार्थों का सेवन कम नहीं करना चाहिए। शरीर को सामान्य रूप से पर्याप्त तरल मिलना जरूरी है। गर्मी, उमस और दिनभर की गतिविधियों के अनुसार पर्याप्त मात्रा में तरल लेने से अगले दिन शरीर पर अचानक पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है। हालांकि पानी की जरूरत हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है। उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। किसी बीमारी या चिकित्सकीय सलाह की स्थिति में डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।

तबीयत खराब हो तो शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें

धार्मिक आस्था अपनी जगह है, लेकिन खराब तबीयत के बावजूद हर स्थिति में व्रत जारी रखना उचित नहीं है। बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होना, भ्रम, अत्यधिक प्यास या असामान्य कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, मधुमेह से पीड़ित लोगों या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

सुबह से घर के कामों में खुद को न थकाएं

तीज के दिन पूजा की तैयारी, सजावट, मेहंदी और घर के दूसरे कामों के बीच महिलाएं कई बार लगातार काम करती रहती हैं। निर्जला व्रत के दौरान ज्यादा देर तक खड़े रहने या अधिक शारीरिक मेहनत करने से थकान और कमजोरी बढ़ सकती है। इसलिए जरूरी तैयारियां पहले पूरी करने की कोशिश करें। भारी काम परिवार के अन्य सदस्यों को सौंपें और दिन के दौरान बीच-बीच में आराम जरूर करें।

गर्मी और धूप में ज्यादा समय बिताने से बचें

निर्जला व्रत के दौरान गर्म मौसम में लंबे समय तक धूप में रहने से शरीर में पानी की कमी का खतरा बढ़ सकता है। इससे कमजोरी और चक्कर जैसी परेशानी हो सकती है। पूजा या धार्मिक कार्यक्रम के लिए बाहर जाना जरूरी हो तो मौसम का ध्यान रखें और संभव हो तो छायादार या अपेक्षाकृत ठंडी जगह पर रहें।

व्रत खोलते ही ज्यादा खाना न खाएं

पूरे दिन व्रत रखने के बाद अचानक बहुत अधिक भोजन करना भी परेशानी का कारण बन सकता है। लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद तला-भुना या भारी खाना खाने से पेट में असहजता हो सकती है। व्रत खोलते समय कम मात्रा में और धीरे-धीरे भोजन करना बेहतर है। शुरुआत फल, हल्के भोजन या आसानी से पचने वाली चीजों से की जा सकती है। इसके बाद जरूरत के अनुसार सामान्य भोजन लिया जा सकता है।

केवल चाय-कॉफी के सहारे न रहें

जो महिलाएं निर्जला व्रत नहीं रखतीं और फलाहार करती हैं, उन्हें भी पूरे दिन सिर्फ चाय या कॉफी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। फलाहार के दौरान फल, दूध, दही और घर में प्रचलित पौष्टिक फलाहारी भोजन को अपनी जरूरत के अनुसार शामिल किया जा सकता है। केवल अत्यधिक मीठे या तले हुए फलाहारी खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहना संतुलित विकल्प नहीं माना जाता।

जरूरी दवाइयों को मनमाने तरीके से बंद न करें

यदि कोई महिला नियमित रूप से जरूरी दवाएं लेती है तो व्रत के कारण दवा बंद करने या उसके समय में खुद से बदलाव करने से बचना चाहिए। कुछ दवाओं का सेवन भोजन या पानी के साथ करना जरूरी हो सकता है। ऐसी स्थिति में व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना उचित है। दवा के समय और व्रत की पद्धति को लेकर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही फैसला करें।

आस्था के साथ सेहत का भी रखें ध्यान

हरतालिका तीज पर पूजा-पाठ और धार्मिक परंपराओं के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। निर्जला व्रत रखने से पहले शरीर को सामान्य रूप से पर्याप्त तरल देना, जरूरत से ज्यादा मेहनत से बचना और तबीयत खराब होने पर लक्षणों को नजरअंदाज न करना जरूरी है। वहीं व्रत खोलते समय भी भोजन धीरे-धीरे और सीमित मात्रा में लेना बेहतर है।

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