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बेड से लेकर बाथरूम तक इन जगहों पर खाना पड़ सकता है भारी! वास्तु में बताया अशुभ, जानें भोजन करने की सही जगह और दिशा

नई दिल्ली: वास्तु शास्त्र में घर की सुख-शांति और समृद्धि से जुड़े कई नियम बताए गए हैं। इन्हीं में भोजन करने की जगह और दिशा से जुड़ी मान्यताएं भी शामिल हैं। मान्यता है कि भोजन केवल भूख मिटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि घर के वातावरण और सकारात्मक ऊर्जा से भी इसका संबंध माना जाता है। इसी वजह से भोजन करते समय जगह की स्वच्छता और आसपास के शांत वातावरण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। हालांकि आज की व्यस्त जीवनशैली में लोग सुविधा के हिसाब से कहीं भी बैठकर खाना शुरू कर देते हैं। कई लोगों को बिस्तर पर मोबाइल या टीवी देखते हुए भोजन करने की आदत होती है, लेकिन वास्तु मान्यताओं में इसे उचित नहीं माना गया है।

बिस्तर पर बैठकर भोजन करना माना जाता है अशुभ

आजकल टीवी या मोबाइल देखते हुए बिस्तर पर खाना खाना आम बात हो गई है। लेकिन वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार बेड को भोजन करने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इस तरह भोजन करने से घर के वातावरण में नकारात्मकता बढ़ सकती है और मानसिक शांति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा बिस्तर पर भोजन करने से खाने के टुकड़े गिरने और गंदगी बढ़ने की समस्या भी हो सकती है।

मुख्य दरवाजे के पास भी भोजन से बचने की सलाह

घर के मुख्य दरवाजे के बिल्कुल पास बैठकर खाना खाने से भी वास्तु के अनुसार बचना चाहिए। मुख्य द्वार से लोगों की लगातार आवाजाही होती रहती है और इसे घर में प्रवेश का प्रमुख स्थान माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के मुताबिक इस जगह पर भोजन करने से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसलिए भोजन के लिए शांत, स्वच्छ और व्यवस्थित स्थान को बेहतर माना जाता है।

बाथरूम के सामने भोजन करना भी उचित नहीं

बाथरूम के सामने या उसके बिल्कुल आसपास बैठकर खाना खाने से भी बचने की सलाह दी जाती है। वास्तु में भोजन करने वाली जगह की स्वच्छता को महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता के अनुसार बाथरूम के पास भोजन करने से वातावरण की स्वच्छता और सकारात्मकता प्रभावित हो सकती है। इसलिए खाना ऐसी जगह खाने की सलाह दी जाती है जो साफ-सुथरी और व्यवस्थित हो।

टूटे बर्तनों में खाना भी माना जाता है अशुभ

वास्तु मान्यताओं के अनुसार टूटे या गंदे बर्तनों में भोजन करना भी अच्छा नहीं माना जाता। यदि प्लेट, कटोरी या गिलास टूट गया है तो उसे इस्तेमाल करने के बजाय अलग कर देना बेहतर माना जाता है। मान्यता है कि टूटे बर्तन घर के सकारात्मक माहौल और सुख-शांति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। इसके साथ ही भोजन हमेशा साफ बर्तनों में करने की सलाह दी जाती है।

अंधेरी जगह पर खाना खाने से बचें

बहुत कम रोशनी या अंधेरे वाली जगह पर भोजन करने से भी बचने की सलाह दी जाती है। भोजन करते समय पर्याप्त रोशनी और स्वच्छ वातावरण होना जरूरी माना जाता है। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार ऐसी जगह भोजन करना बेहतर होता है जहां पर्याप्त प्राकृतिक या कृत्रिम प्रकाश उपलब्ध हो।

पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके भोजन की मान्यता

वास्तु मान्यताओं में भोजन करने के लिए साफ, शांत और व्यवस्थित स्थान को शुभ माना गया है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके भोजन करना अच्छा माना जाता है। जमीन पर आराम से बैठकर भोजन करना भी भारतीय परंपरा में शुभ और सुविधाजनक माना गया है। हालांकि, ये सभी बातें वास्तु से जुड़ी मान्यताएं हैं और वैज्ञानिक रूप से इनका आर्थिक स्थिति पर सीधा प्रभाव प्रमाणित नहीं है।

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