
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की मूर्ति कथित तौर पर हटाकर पास के जंगल में फेंके जाने के आरोप के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस ने घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मूर्ति को उसके मूल स्थान पर दोबारा स्थापित करने और जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं भाजपा ने इस घटना में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है।
आरोप है कि हर्षवर्धन प्राइमरी स्कूल के पास स्थित मेडिटेशन सेंटर के सामने लंबे समय से नेहरू की मूर्ति स्थापित थी। कांग्रेस का दावा है कि क्रेन की मदद से मूर्ति को वहां से हटाया गया और पास के जंगल में फेंक दिया गया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
क्रेन से मूर्ति हटाने का लगाया आरोप
जिला कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि नेहरू की मूर्ति को सम्मानपूर्वक उसके पुराने स्थान पर फिर से स्थापित किया जाए। साथ ही मूर्ति हटाने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।
कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया गंभीर आरोप
जिला कांग्रेस अध्यक्ष देबेश चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि भाजपा ने जानबूझकर देश के पहले प्रधानमंत्री की मूर्ति का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रतिमा हटाए जाने का मामला नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम, देश के इतिहास और लोकतांत्रिक विरासत से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विचारधारात्मक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व की प्रतिमा को हटाकर विरोध दर्ज कराना उचित नहीं माना जा सकता।
‘नेहरू सिर्फ कांग्रेस के नेता नहीं थे’
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने भी कथित घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू केवल कांग्रेस के नेता नहीं थे। वह स्वतंत्रता सेनानी और देश के पहले प्रधानमंत्री थे तथा आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
शुभंकर सरकार ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी को भी देश के पहले प्रधानमंत्री का अपमान करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने मूर्ति को तत्काल उसके मूल स्थान पर स्थापित करने और दोषियों की पहचान कर गिरफ्तारी की मांग की।
भाजपा विधायक ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
दुर्गापुर पूर्व से भाजपा विधायक चंद्र शेखर बंद्योपाध्याय ने मूर्ति हटाने में भाजपा की भूमिका से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा न तो इस तरह की किसी घटना में शामिल है और न ही ऐसे कृत्य का समर्थन करती है।
भाजपा विधायक ने पूरे विवाद के पीछे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीतिक खींचतान को जिम्मेदार बताया। उनका दावा है कि बदलते राजनीतिक समीकरण के बीच तृणमूल कांग्रेस के कई लोग कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं और राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बने रहने के लिए इस तरह के विवाद खड़े किए जा रहे हैं।
नेहरू की विरासत को लेकर फिर आमने-सामने कांग्रेस-भाजपा
पंडित जवाहरलाल नेहरू की भूमिका को लेकर देश में लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक मत रहे हैं। उनकी आर्थिक नीतियों, विदेश नीति, औद्योगिकीकरण और शुरुआती नीति-निर्माण को लेकर समय-समय पर राजनीतिक बहस होती रही है। कांग्रेस का कहना है कि इन मतभेदों के बावजूद स्वतंत्रता आंदोलन और लोकतांत्रिक व्यवस्था में नेहरू की ऐतिहासिक भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि मूर्ति को जल्द उसके मूल स्थान पर स्थापित नहीं किया गया और मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो राज्य तथा स्थानीय स्तर पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।



