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India-EU FTA से भारतीय कारों को यूरोप में बड़ा फायदा! 5वें साल से शून्य होगा शुल्क, 10वें साल तक बढ़ेगा कोटा

नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए के मसौदे में भारतीय कारों के लिए यूरोपीय बाजार का रास्ता आसान करने की अहम व्यवस्था की गई है। इसके तहत पहले साल भारत में बनी 2.5 लाख यात्री कारों को यूरोपीय संघ के बाजार में 8 प्रतिशत रियायती शुल्क पर प्रवेश मिलेगा। यह कोटा धीरे-धीरे बढ़ते हुए समझौते के 10वें साल से 4 लाख वाहन सालाना हो जाएगा। इतना ही नहीं, इन पात्र कारों पर शुल्क भी चरणबद्ध तरीके से घटाकर पांचवें साल से पूरी तरह शून्य करने का प्रस्ताव है।

पहले साल 2.5 लाख कारों को मिलेगा रियायती शुल्क

मसौदे के मुताबिक पहले साल 2.5 लाख भारतीय कारों को यूरोपीय बाजार में कम शुल्क का लाभ मिलेगा। यह व्यवस्था भारतीय मूल की आंतरिक दहन इंजन यानी आईसीई कारों और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों यानी एचईवी के लिए है।

इसके लिए कार की सीआईएफ कीमत 50 हजार यूरो तक होनी चाहिए। सीआईएफ कीमत में वाहन की खरीद कीमत के साथ यूरोपीय संघ के बंदरगाह तक माल ढुलाई और बीमा खर्च भी शामिल होता है। तय कोटे में आने वाली पात्र कारों पर पहले साल 8 प्रतिशत शुल्क लागू होगा।

8% से शुरू होकर पांचवें साल शून्य हो जाएगा शुल्क

भारतीय कारों के शुल्क में एक साथ कटौती नहीं होगी, बल्कि इसे कई चरणों में कम किया जाएगा। पहले साल 8 प्रतिशत शुल्क रहेगा। दूसरे साल यह 6 प्रतिशत, तीसरे साल 4 प्रतिशत और चौथे साल 2 प्रतिशत रह जाएगा। पांचवें साल से पात्र कारों पर आयात शुल्क पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

यानी तय कोटे के भीतर आने वाली कारों को पांचवें साल से यूरोपीय बाजार में बिना आयात शुल्क के प्रवेश मिल सकेगा।

10वें साल से हर साल 4 लाख कारों का कोटा

शुल्क में कटौती के साथ ही रियायती कोटे में आने वाली कारों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। शुरुआत 2.5 लाख वाहनों से होगी और अगले वर्षों में यह संख्या क्रमशः बढ़ेगी। समझौते के 10वें साल से भारतीय कारों के लिए यह कोटा 4 लाख वाहन सालाना हो जाएगा।

हालांकि, निर्धारित कोटे से अधिक वाहनों पर सामान्य एमएफएन यानी सबसे पसंदीदा देश वाला शुल्क लागू होगा।

50 हजार यूरो से महंगी कारों के लिए भी राहत

50 हजार यूरो से अधिक सीआईएफ कीमत वाली कारों को शुरुआती वर्षों में कोटा आधारित रियायती शुल्क का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, इनके लिए भी शुल्क में चरणबद्ध कमी का प्रावधान किया गया है।

इन वाहनों पर पहले साल 8 प्रतिशत शुल्क रहेगा और समझौते के 10वें साल तक इसे घटाकर शून्य करने का प्रस्ताव है। इस तरह कार की कीमत के आधार पर अलग-अलग शुल्क व्यवस्था तैयार की गई है।

इलेक्ट्रिक कारों के लिए अलग कोटा और शुल्क व्यवस्था

बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन यानी बीईवी, प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन यानी पीएचईवी और आईसीई तथा एचईवी के अलावा अन्य तकनीक वाली यात्री कारों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है।

40 हजार यूरो तक की सीआईएफ कीमत वाली इन कारों के लिए व्यवस्था समझौते के पांचवें साल से शुरू होगी। शुरुआत में 27,500 वाहनों को 8 प्रतिशत शुल्क पर यूरोपीय बाजार में प्रवेश मिलेगा। यह कोटा नौवें साल बढ़कर 60,500 और 14वें साल से 1.25 लाख वाहन सालाना हो जाएगा। इस श्रेणी में शुल्क नौवें साल से खत्म करने का प्रावधान है।

महंगी इलेक्ट्रिक कारों के लिए भी तय किया गया कोटा

40 हजार यूरो से अधिक और 60 हजार यूरो तक की सीआईएफ कीमत वाली कारों के लिए पांचवें साल से 16,250 वाहनों का कोटा निर्धारित किया जाएगा। यह संख्या 14वें साल से बढ़कर 75 हजार वाहन सालाना हो जाएगी और शुल्क शून्य हो जाएगा।

वहीं, 60 हजार यूरो से अधिक कीमत वाली कारों के लिए पांचवें साल 6,250 वाहनों का कोटा होगा। नौवें साल यह 13,250 और 14वें साल से 25 हजार वाहन सालाना हो जाएगा। इस श्रेणी में भी नौवें साल से शुल्क खत्म करने का प्रावधान है।

कारों के अलावा इन भारतीय उत्पादों को भी मिल सकती है राहत

भारत-ईयू एफटीए का संभावित फायदा केवल वाहन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। मसौदे में कुछ भारतीय कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को भी कोटा आधारित शुल्क रियायत देने का प्रावधान किया गया है।

इनमें टेबल अंगूर, सूखे प्याज, खीरा और घेरकिन, शीरे से बनी रम और घी शामिल हैं। घी के लिए समझौते के प्रभावी होने की तारीख से हर साल 1,000 मीट्रिक टन की कुल मात्रा पर आधार सीमा शुल्क की 50 प्रतिशत दर का प्रावधान किया गया है।

भारतीय वाहन कंपनियों के लिए क्यों अहम है यह समझौता?

प्रस्तावित एफटीए भारतीय वाहन निर्माताओं के लिए यूरोपीय बाजार में विस्तार का बड़ा अवसर पैदा कर सकता है। पहले साल 2.5 लाख वाहनों के रियायती कोटे से शुरुआत और 10वें साल से 4 लाख वाहनों का कोटा भारतीय कारों की यूरोप में पहुंच बढ़ा सकता है। पांचवें साल से शुल्क शून्य होना भी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण राहत होगी।

हालांकि, वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि भारतीय कंपनियां तय कीमत, कोटा और तकनीक से जुड़ी शर्तों के भीतर कितनी कारों का निर्यात कर पाती हैं। इसके बावजूद भारत-ईयू एफटीए को भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए यूरोपीय बाजार में नई संभावनाएं खोलने वाला अहम कदम माना जा रहा है।

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