रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ की तैयारी, भारत का नाम भी शामिल; अमेरिकी बिल से बढ़ा दबाव, जानें पूरा मामला

नई दिल्ली: अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ करने वाले विधेयक को प्रतिनिधि सभा में आगे बढ़ाया गया है। इस बिल के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के ऊर्जा कारोबार से जुड़े देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत भी प्रस्तावित सूची में शामिल है। हालांकि, 100% टैरिफ अभी स्वतः लागू नहीं हुआ है और इसके लिए विधेयक को आगे की संसदीय प्रक्रिया से गुजरना होगा।
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इससे पहले कहा था कि भारत अमेरिकी विधेयक से जुड़े घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है।
लिंडसे ग्राहम बिल सीनेट से 86-11 के अंतर से पास
अमेरिका के इस विधेयक का नाम Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 है। इसे अमेरिकी सीनेट ने 7 अगस्त को 86-11 के वोट से मंजूरी दी थी। सीनेट के संस्करण में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े आयातकों का जिक्र किया गया था, लेकिन देशों के नाम सीधे नहीं लिखे गए थे। अब प्रतिनिधि सभा में इस बिल को लेकर आगे की प्रक्रिया चल रही है।
भारत समेत 10 देशों के नाम जोड़ने का प्रस्ताव
प्रतिनिधि सभा में पेश किए गए एक संशोधन में रूस से तेल खरीदने वाले संभावित लक्षित देशों के नाम सीधे शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें भारत के अलावा चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, यूएई, सिंगापुर, कजाखिस्तान और किर्गिस्तान के नाम हैं। अगर यह संशोधन बिल का हिस्सा बनता है, तो इन देशों को 100% तक टैरिफ के दायरे में लाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, किसी देश का नाम प्रस्तावित सूची में होना अपने आप टैरिफ लागू होने के बराबर नहीं है।
भारत पर टैरिफ का खतरा क्यों बढ़ा
अमेरिका लंबे समय से रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर दबाव बनाता रहा है। अमेरिकी पक्ष का तर्क रहा है कि रूस से ऊर्जा खरीद से उसे यूक्रेन युद्ध के बीच राजस्व मिलता है। नए विधेयक में राष्ट्रपति को रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदार देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है।
भारत की ओर से कहा गया है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है। इसलिए मौजूदा अमेरिकी विधायी प्रक्रिया के बीच भी नई दिल्ली घटनाक्रम पर नजर रख रही है और अपनी ऊर्जा नीति से जुड़े हितों को प्राथमिकता दे रही है।
अभी 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में बिल को आगे बढ़ाया जा चुका है, लेकिन इसे अंतिम रूप मिलने और उसके बाद राष्ट्रपति के स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया अभी बाकी है। इसके अलावा प्रतिनिधि सभा में अलग-अलग संशोधनों को लेकर भी चर्चा हो रही है। इसलिए फिलहाल भारत पर 100% टैरिफ लगना तय नहीं माना जा सकता।



