देहरादून: पुलिस बल में महिला आरक्षण और उनके पदों की संख्या बढ़ाना आज के समय की एक बेहद महत्वपूर्ण और अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। केंद्र सरकार का लक्ष्य सभी राज्यों की पुलिस में महिलाओं की भागीदारी 33% तक पहुँचाने का है, जिसके तहत हाल ही में कई राज्यों ने बड़े कदम भी उठाए हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपदीय पुलिस में महिला आरक्षियों के पदों की संख्या वर्तमान 526 से बढ़ाकर 2000 किए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदन प्रदान कर दिया है।
इसके तहत 1474 अतिरिक्त पद अन्य संवर्गों एवं शाखाओं के स्वीकृत पदों से समायोजित किए जाने का प्रस्ताव है। इस संबंध में कार्मिक विभाग द्वारा बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय भार के तथा कुल स्वीकृत पदों की संख्या में वृद्धि किए बिना, वर्तमान में कार्यरत 1210 अधिसंख्य महिला आरक्षियों के समायोजन और भविष्य में उनकी पदोन्नति के अवसर सुनिश्चित करने के लिए उच्चतर पदों के पुनर्गठन का पृथक प्रस्ताव उपलब्ध कराने की शर्त पर सहमति व्यक्त की गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। इस निर्णय से जनपदीय पुलिस में महिला आरक्षियों के पदों की संख्या में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। साथ ही, वर्तमान में कार्यरत अधिसंख्य महिला आरक्षियों के समायोजन तथा उनके लिए भविष्य में पदोन्नति के अवसरों की व्यवस्था करने की दिशा में भी पहल की जाएगी।
“प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए हमारी सरकार निरंतर प्रयासरत है।हमारी सरकार का उद्देश्य महिला पुलिस कर्मियों को सेवा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही उनके भविष्य को सुरक्षित और उज्ज्वल बनाना है।”
— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
आपको बता दें कि बिहार में महिलाओं के लिए 35% और राजस्थान में इसे बढ़ाकर 33% आरक्षण कर दिया गया है। इसके बावजूद, राष्ट्रीय स्तर पर कुल पुलिस बल में महिलाओं की वास्तविक संख्या अभी भी लगभग 11.75% के आसपास ही है।
पुलिस में महिलाओं के पद बढ़ाना क्यों जरूरी है?
महिला सुरक्षा और संवेदनशीलता की दृष्टि से यह जरूरी है। पुलिस थानों में अपनी शिकायत लेकर आने वाली पीड़ित महिलाओं की बात एक महिला पुलिसकर्मी अधिक संवेदनशीलता और गहराई से सुन सकती है। इससे महिलाएं बिना किसी झिझक या डर के अपराधों (जैसे घरेलू हिंसा, छेड़छाड़, या यौन उत्पीड़न) की रिपोर्ट दर्ज करवा पाती हैं।
कानून-व्यवस्था में सुधार की दृष्टि से यह आवश्यक है। लैंगिक रूप से संतुलित पुलिस बल समाज में अधिक भरोसा पैदा करता है। महिलाओं की मौजूदगी से भीड़ नियंत्रण और विरोध प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था संभालना अधिक सुगम और शांतिपूर्ण हो जाता है।
समानता और महिला सशक्तीकरण के लिहाज से यह कदम अपेक्षित है। पुलिस जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी रूढ़िवादिता और पितृसत्तात्मक मानसिकता को तोड़ती है। इससे समाज की अन्य बेटियों को भी आत्मनिर्भर और साहसी बनने की प्रेरणा मिलती है।




