स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री आर.के शनमुखम चेट्टी की जयंती पर जानिए उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

नई दिल्ली ( दस्तक डेस्क) : आज स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री आर. के. शनमुखम चेट्टी (R. K. Shanmukham Chetty) की जयंती है। उनका जन्म 17 अक्टूबर 1892 को तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक उद्योगपति परिवार में हुआ था। भारत के आर्थिक विकास की नीतियों की कहानी उन्हीं से शुरू होती है। चेट्टी जी ने 1944 में ऐतिहासिक ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (Bretton Woods Conference) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनकर वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंच पर भारत का पक्ष रखा था।

दिलचस्प बात यह है कि वह न तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य थे और न ही संविधान सभा के। वह तो एक व्यवसायी थे, जो हमेशा कांग्रेस विरोधी रहे। उनके बारे में इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने अपनी किताब, ‘गाँधी के बाद भारत’ में लिखा है कि वह “भारत में सबसे अच्छी वित्तीय समझ रखने वालों में से एक थे। “26 नवंबर 1947 को चेट्टी ने संसद में भारत का पहला बजट पेश किया। उनका पहला बजट केवल 7.5 महीनों की अवधि (15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक) के लिए था। यह एक प्रकार का आर्थिक रिव्यू था, जिसमें कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया था।
इस वक़्त भारत विभाजन, गंभीर गरीबी और शरणार्थियों की समस्याओं से जूझ रहां था। इसलिए चेट्टी ने अपने बजट में भुखमरी हटाने और कश्मीर-विवाद में बचाव को खास तौर पर ध्यान में रखा।अपने ऐतिहासिक बजट भाषण को खत्म करते हुए चेट्टी ने कहा था, “कुछ समय पहले ही, गुलामी से आज़ाद हुए भारत को यदि अपना भविष्य एशिया के लीडर के तौर पर बनाना है और अपनी जगह सभी आज़ाद राष्ट्रों से आगे बनानी है तो यह ज़रूरी है कि भारत के सभी बेटे आने वाले सालों में पूरी निष्ठा से काम करें।”

चेट्टी तमिलनाडु से संबंध रखते थे। वे एक कुशल वकील, अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ थे। 1947 से 1948 तक भारत के वित्त मंत्री रहने के अलावा, वे 1933 से 1935 तक केंद्रीय विधानसभा (Central Legislative Assembly) के अध्यक्ष और 1935 से 1941 तक कोचीन राज्य के दीवान भी रहे। उन्होंने जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
1932 में कनाडा के ओटावा में हुए इम्पीरियल इकोनॉमिक कॉन्फ्रेंस में भी वे भारतीय प्रतिनिधि थे। इससे उनकी पहचान एक अच्छे अर्थशास्त्री के रूप में और मजबूत हुई।चेट्टि ने जस्टिस पार्टी से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। साल 1917 में वे कोयंबटूर नगर पालिका के काउंसलर बने। बाद में उपाध्यक्ष भी रहे। नगर प्रशासन में उन्होंने कई सुधार किए, जिसकी काफी सराहना हुई। 1920 में वे मद्रास विधान परिषद के सदस्य बने। कुछ साल बाद उन्होंने स्वराज पार्टी जॉइन की और 1924 में केंद्रीय विधान सभा के सदस्य चुने गए। यहां उनकी पहचान एक समझदार और पढ़े-लिखे नेता के रूप में बनी।

जब देश आजाद हुआ, तो पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें भारत का पहला वित्त मंत्री बनाया। यह फैसला उस समय थोड़ा चौंकाने वाला माना गया, क्योंकि चेट्टि के बारे में कहा जाता था कि उनके विचार अंग्रेजों के प्रति नरम थे फिर भी नेहरू ने उनकी आर्थिक समझ और अनुभव को देखते हुए यह जिम्मेदारी दी।
वैचारिक मतभेदों और एक कर-चोरी (Tax Evasion) की जांच से जुड़े विवाद के चलते उन्होंने 1948 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वे आजाद भारत के पहले ऐसे मंत्री बने जिन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। गौरतलब है कि तमिलनाडु, वह राज्य है जिसने भारत को सबसे ज्यादा (निर्मला सीतारमण के अलावा आज़ादी से अब तक पांच और) वित्त मंत्री दिए हैं।



