दस्तक-विशेष

आज ही के दिन गठित हुआ था आजाद हिंद फौज के झांसी की रानी ब्रिगेड

नई दिल्ली ( दस्तक विशेष) : झांसी की रानी ब्रिगेड (Rani of Jhansi Regiment) का गठन 23 अक्टूबर 1943 को हुआ था।नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में आजाद हिंद फौज (INA) के तहत इस विशेष महिला सैन्य रेजीमेंट की स्थापना की थी, जिसका नाम महान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर रखा गया था।

देश की पहली महिला रेजिमेंट का नाम झांसी की रानी के नाम पर रखा गया था। इस रेजिमेंट को बनाने का उद्देश्य भारत की महिलाओं को देश की आजादी के लिए आगे लाना था। यह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दुनिया में मौजूद महिला आर्मी रेजिमेंट में से एक थी। इंडियन नेशनल आर्मी की इस महिला रेजिमेंट का नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया था। ये वहीं लक्ष्मी सहगल हैं जिन्होंने 2002 में एपीजे अब्दुल कलाम के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था। आजाद हिंद फौज की इस महिला यूनिट की स्थापना 12 जुलाई 1943 में सुभाष चंद्र बोस ने की थी। यह यूनिट दक्षिण पूर्व एशिया में प्रवासी भारतीय आबादी के वालंटियर के साथ की गई थी।

सफेद साड़ी थी ‘रानी रानी रेजिमेंट’ की यूनिफॉर्म

ये अबतक की देश की एकमात्र महिला रेजिमेंट थी। ये रेजिमेंट देश के बाहर बनी थी। इसका केंद्र शुरुआत में सिंगापुर में था, जहां सभी कैडेट को उनकी क्वालिफिकेशन के आधार पर डिविजन में बांटा गया। सिंगापुर के बाद रंगून और बैंकॉक में इसके कैंप स्थापित किए गए और नवंबर तक महिला रेजिमेंट में कुल कैडेट की संख्या 300 से अधिक हो चुकी थी। 23 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में उनका प्रशिक्षण शुरू हुआ था। कैडेट्स को वर्गों और में विभाजित किया गया। शैक्षिक योग्यता के अनुसार अफसरों और सिपाहियों के रैंक दिए गए थे।

देश की एकमात्र महिला रेजिमेंट की पहली पासिंग आउट परेड 30 मार्च 1944 को सिंगापुर के सैन्य प्रशिक्षण शिविर में हुई थी। वहीं 200 कैडेटों को नर्सिंग प्रशिक्षण के लिए भी चुना गया था। जिससे ‘चांद बीबी नर्सिंग कोर’ का गठन हुआ। बोस को फीमेल गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। आईएनए से उधार ली गई ली-एनफील्ड 303 राइफलों का उपयोग करके करीब 20 महिलाओं को इसके लिए प्रशिक्षित किया गया था। यूनिफॉर्म सिलने का समय ना रहने पर महिलाओं ने इसके लिए सफेद साड़ी पहनी थी।

डॉक्टर से रानी झांसी रेजिमेंट की कैप्टन बनीं लक्ष्मी सहगल

24 अक्टूबर, 1914 को मद्रास में जन्मीं लक्ष्मी सहगल डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करनी चाहती थीं। उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई की, लेकिन वो अंग्रेजी सेना में डॉक्टर के तौर पर काम नहीं करना चाहती थीं। इसलिए वो सिंगापुर चली गईं। जहां उन्होंने रिश्तेदारों के घर रहकर प्राइवेट मेडिकल प्रैक्टिस शुरू कर दी। सिंगापुर में दक्षिण भारतीय मूल के बहुत लोग रहते थे, लक्ष्मी के मरीजों में चीनी और मलय समुदाय के लोग भी शामिल थे।

पांच घंटे चले इंटरव्यू के बाद हुआ था लक्ष्मी का चयन

जापान ने सिंगापुर पर 8 दिसंबर, 1941 के दिन आक्रमण किया। रासबिहारी बोस भी जापानी फौज के साथ थे और उन्होंने इंडियन इंडिपेंडेन्स लीग की शुरुआत की। सभी भारतीयों से लीग में शामिल होने की उम्मीद की जा रही थी। लक्ष्मी भी लीग में शामिल हो गईं। लक्ष्मी बदलाव चाहती थीं और इस सिलसिले में वो सिंगापुर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस से मिलीं। नेताजी ने लक्ष्मी सहगल का लगभग 5 घंटे का इंटरव्यू लिया और इतने समय में महिलाओं की ‘रानी झांसी रेजिमेंट’ बनाने का निर्णय लिया। रेजिमेंट की कमान लक्ष्मी के हाथों में दी गई और वो डॉक्टर से कैप्टन बन गईं।

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