
नई दिल्ली: चाय और कॉफी पीने की आदत को अक्सर सेहत के लिहाज से बहस का विषय माना जाता है, लेकिन एक नए अध्ययन में इनके सेवन और बढ़ती उम्र में शारीरिक मजबूती के बीच संबंध सामने आया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, अधेड़ उम्र में नियमित रूप से कॉफी, ब्लैक टी या ग्रीन टी पीने वाले लोगों में बुढ़ापे के दौरान शारीरिक कमजोरी का जोखिम कम पाया गया। अध्ययन में रोजाना चार या उससे अधिक कप कॉफी पीने वालों के साथ-साथ नियमित रूप से ब्लैक और ग्रीन टी पीने वालों में भी सकारात्मक संबंध देखा गया।
हालांकि, शोध के निष्कर्ष यह साबित नहीं करते कि चाय या कॉफी पीने से सीधे तौर पर शरीर मजबूत होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस संबंध के पीछे कैफीन की भूमिका है या इन पेय पदार्थों में मौजूद अन्य रासायनिक तत्वों का असर, इसे समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
20 साल तक 12 हजार लोगों पर हुई रिसर्च
यह अध्ययन सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी की शोध टीम ने किया। इसमें 45 से 74 वर्ष की उम्र के लगभग 12,000 लोगों की जानकारी का करीब 20 साल तक विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि अधेड़ उम्र में कैफीन वाले पेय पदार्थों के सेवन और आगे चलकर शारीरिक कमजोरी के बीच क्या संबंध हो सकता है।
यूनिवर्सिटी के योंग लू लिन स्कूल ऑफ मेडिसिन में हेल्दी लॉन्गेविटी ट्रांसलेशनल रिसर्च प्रोग्राम से जुड़े प्रोफेसर कोह वून पुए के अनुसार, सिंगापुर सहित दुनिया के कई हिस्सों में चाय और कॉफी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। अध्ययन के नतीजे संकेत देते हैं कि मध्य आयु में इनका सेवन जीवन के बाद के वर्षों में शारीरिक कमजोरी की कम आशंका से जुड़ा हो सकता है।
शोध में लोगों की इन आदतों पर रखी गई नजर
अध्ययन में शामिल लोगों की औसत उम्र शुरुआती आकलन के समय करीब 53 वर्ष थी। उनसे कॉफी, चाय, कोल्ड ड्रिंक्स और चॉकलेट जैसे कैफीन वाले खाद्य पदार्थों के सेवन की आदतों के बारे में जानकारी ली गई।
बाद के आकलन में, जब प्रतिभागियों की औसत उम्र करीब 73 वर्ष थी, तब उनके शारीरिक स्वास्थ्य और काम करने की क्षमता का मूल्यांकन किया गया। इसके लिए वजन और ऊर्जा स्तर जैसी जानकारियों के साथ हैंडग्रिप स्ट्रेंथ यानी हाथों की पकड़ की ताकत और टाइम अप एंड गो (TUG) टेस्ट का इस्तेमाल किया गया। TUG टेस्ट में यह देखा जाता है कि कोई व्यक्ति कुर्सी से उठकर थोड़ी दूरी चलने और वापस बैठने में कितना सक्षम है।
रोजाना कितने कप कॉफी पीने वालों को मिला फायदा?
अध्ययन में शामिल लोगों में से 68.5 प्रतिशत रोजाना कॉफी पीते थे। इनमें 52.9 प्रतिशत लोग प्रतिदिन एक कप कॉफी पीते थे, जबकि 42.2 प्रतिशत लोग दिन में दो से तीन कप कॉफी का सेवन करते थे। बाकी प्रतिभागी रोजाना चार या उससे अधिक कप कॉफी पीने वालों के समूह में शामिल थे।
शोध के नतीजों के मुताबिक, मध्य आयु में रोजाना चार या उससे अधिक कप कॉफी पीने वाले लोगों में बाद की उम्र में शारीरिक कमजोरी की आशंका उन लोगों के मुकाबले कम पाई गई, जो कॉफी नहीं पीते थे।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति को रोजाना चार कप कॉफी पीनी चाहिए। कैफीन का असर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, नींद और उसकी संवेदनशीलता के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
ब्लैक टी और ग्रीन टी पीने वालों में भी दिखा संबंध
शोध में कॉफी के अलावा ब्लैक टी और ग्रीन टी के सेवन का भी विश्लेषण किया गया। चाय पीने वालों को उनकी आदत के आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटा गया, जिनमें चाय बिल्कुल नहीं पीने वाले, महीने में कम से कम एक बार पीने वाले, सप्ताह में कम से कम एक बार पीने वाले और रोजाना चाय पीने वाले लोग शामिल थे।
नतीजों में नियमित रूप से ब्लैक टी या ग्रीन टी पीने वालों में चाय नहीं पीने वालों की तुलना में बाद की उम्र में शारीरिक कमजोरी की कम आशंका देखी गई। हालांकि, अध्ययन से यह निश्चित नहीं होता कि यह संबंध केवल कैफीन की वजह से था या चाय में मौजूद अन्य तत्वों का भी इसमें योगदान था।
क्या रोजाना ज्यादा चाय-कॉफी पीना सही है?
शोध के नतीजों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अध्ययन में पेय पदार्थों के सेवन और शारीरिक कमजोरी के बीच संबंध देखा गया है, न कि यह साबित किया गया है कि ज्यादा चाय-कॉफी पीने से कमजोरी दूर हो जाती है।
अधिक कैफीन लेने से कुछ लोगों को नींद में परेशानी, बेचैनी, घबराहट या दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए केवल इस अध्ययन के आधार पर चाय या कॉफी की मात्रा बढ़ाना उचित नहीं है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्वास्थ्य की देखभाल भी उम्र बढ़ने के साथ शरीर को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।



