भारत सरकार ने देशभर में लैब्स में जानवरों के इस्तेमाल को लेकर नए नियमों का रखा प्रस्ताव

नई दिल्ली ( दस्तक डेस्क) : देश भर में प्रयोगशालाओं यानि लैब्स में जानवरों के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार ने नए नियमों का प्रस्ताव रखा है जिस पर मिली जुली प्रतिक्रिया आ रही है। इसका ड्राफ्ट 6 अक्टूबर को जारी किया गया, जिसमें कुछ अच्छे सुझाव भी शामिल हैं, जैसे कि जानवरों की जगह अन्य विकल्पों का इस्तेमाल और एक्सपेरिमेंट के दौरान जानवरों को होने वाले दर्द की तकलीफ को कम करना लेकिन, इसमें मौजूद कई प्रावधान जानवरों के कल्याण, प्रयोगशालाओं के लिए जानवरों को लाने के स्रोतों और उनकी सुरक्षा के लिए बनाए गए सुरक्षा उपायों की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। यह ड्राफ्ट 5 नवंबर तक सार्वजनिक टिप्पणी के लिए खुला है। नियमों को अंतिम रूप देने से पहले, इन चिंताओं पर दोबारा और ध्यानपूर्वक विचार किया जाना चाहिए।
लैब्स जानवरों को प्राप्त करने के और रास्ते :
आमतौर पर यह अपेक्षा की जाती है कि लैब्स, जानवरों को रजिस्टर्ड ब्रीडर्स और ट्रेडर्स से प्राप्त करें, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उनके मूल स्रोत का पता लगाया जा सकेगा लेकिन इस ड्राफ्ट में कुछ अपवाद रखे गए हैं, जिनसे उन स्रोतों का दायरा बढ़ सकता है, जहां से जानवर प्राप्त किए जाते हैं। अगर कुछ खास तरह के पालतू और खेती में इस्तेमाल होने वाले जानवर, मछलियां या पक्षी रजिस्टर्ड सप्लायर्स के पास उपलब्ध नहीं हैं, तो लैब उन्हें बिना रजिस्ट्रेशन वाले संस्थानों या खुले बाजार से भी खरीद सकती हैं। हालांकि, इसके लिए संस्थागत एथिक्स कमेटी की मंजूरी, जरूरी दस्तावेज और पशु चिकित्सक से प्रमाणित क्वारंटीन की शर्तें पूरी करनी होंगी।
यह ड्राफ्ट जंगली जानवरों के इस्तेमाल के लिए कुछ अपवादों की भी अनुमति देता है, खासकर तब, जब प्रयोगों के लिए पाले गए जानवरों से रिसर्च का उद्देश्य पूरा न हो सके। संरक्षित वन्यजीवों के मामले में अतिरिक्त पाबंदियां और अनुमति की जरूरतें लागू होती हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह से दायरे से बाहर नहीं रखा गया है और भी चिंता की बात यह है कि यह ड्राफ्ट अधिकारियों को उन उपायों से छूट देने की अनुमति देता है, जिनका मकसद पकड़े जाने के दौरान या बाद में घायल या बीमार पाए गए जंगली जानवरों की तकलीफ को कम करना होता है—बशर्ते इसके लिए कोई वैज्ञानिक तर्क स्वीकार कर लिया जाए।
ये छूट बिना किसी शर्त के नहीं दी गई हैं, लेकिन इनके जरिए ऐसे रास्ते खुलते हैं जिनकी बारीकी से जांच होनी चाहिए। जानवरों को रिसर्च के लिए चुनते समय उनकी खरीद और स्रोत का पूरा रिकॉर्ड होना चाहिए, उनकी देखभाल और सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए और जंगल से पकड़कर लाने से बचना चाहिए। अंतिम नियम ऐसे सुरक्षा उपायों को और मजबूत बनाने वाले होने चाहिए, न कि बिना किसी ठोस वजह के छूट का दायरा बढ़ाने वाले।
ड्राफ्ट में आम तौर पर सड़कों पर रहने वाले और बिना किसी मालिक के घूमने वाले पालतू जानवरों पर प्रयोग करने की मनाही है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इसकी छूट दी गई है। इनमें जानवरों की सेहत या उनकी भलाई से जुड़ी कोई जरूरी जरूरत, या पर्यावरण, इंसानों या दूसरे जानवरों की सेहत के लिए गंभीर खतरा शामिल है। रिसर्च करने वालों को यह भी बताना होगा कि उनका मकसद किसी सड़क पर रहने वाले या बिना मालिक के घूमने वाले जानवर का इस्तेमाल किए बिना पूरा क्यों नहीं किया जा सकता।



