प्रधानमंत्री मोदी 2 नवंबर को भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और एक्सपो 2026 का करेंगे उद्घाटन :

नई दिल्ली ( दस्तक डेस्क) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2 नवंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम् में भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और एक्सपो 2026 का उद्घाटन करेंगे। यह शिखर सम्मेलन वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है।
नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि चार दिवसीय यह आयोजन सरकारों, नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों, निवेशकों, नवोन्मेषकों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को सहयोग में बढ़ावा देने और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने के लिए एक साथ लाएगा।

ऊर्जा सचिव ने बताया कि शिखर सम्मेलन के दौरान ही अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन सभा का 9वां सत्र और हरित हाइड्रोजन पर चौथा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। श्री सारंगी ने बताया कि इस आयोजन में 130 से अधिक देशों की भागीदारी की उम्मीद है।
नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की वर्तमान स्थिति :
नवीकरणीय ऊर्जा सांख्यिकी 2026 के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है। भारत इस रैंकिंग में ब्राजील से आगे निकल गया है। अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी ने दिसंबर 2025 तक के जो आंकड़े जारी किए थे, उनमें इस बात का जिक्र किया गया है।
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 55.3 गीगावाट की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता वृद्धि हासिल की है। 31.03.2026 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से कुल 283.46 गीगावाट क्षमता स्थापित की जा चुकी है। इसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा (150.26 गीगावाट सौर ऊर्जा, 56.09 गीगावाट पवन ऊर्जा, 11.75 गीगावाट जैव ऊर्जा, 5.17 गीगावाट लघु जल विद्युत, 51.41 गीगावाट वृहद जल विद्युत) और 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता शामिल है।
वहीं नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 31 जुलाई 2026 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से कुल 300.50 गीगावॉट क्षमता स्थापित की जा चुकी है जो कुल स्थापित क्षमता का 54% से अधिक है।
सौर ऊर्जा विस्तार:
भारत की स्थापित सौर क्षमता 164.59 गीगावॉट (31 जुलाई 2026 तक) तक पहुंच गई है, जो 2014 में 2.8 गीगावॉट से बढ़ रही है। सौर अब भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का सबसे बड़ा घटक है। भारत 2025 में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर विकास बाजार बन गया, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा जोड़ी गई 34 गीगावॉट की तुलना में 37 गीगावॉट से अधिक सौर क्षमता जोड़कर।

पवन ऊर्जा का विस्तार :
पवन ऊर्जा पवन ऊर्जा भारत के नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनी हुई है। भारत स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता में विश्व स्तर पर चौथे स्थान पर है । इस क्षेत्र में मजबूत वार्षिक वृद्धि और घरेलू विनिर्माण में वृद्धि भी देखी जा रही है।
इसमें स्थापित क्षमता: 31 जुलाई 2026 तक 58.14 गीगावॉट है। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 मे 6.05 गीगावॉट जोड़ा, जो इसकी अब तक की सबसे अधिक वार्षिक पवन क्षमता वृद्धि है और वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 46% अधिक है।

जैव ऊर्जा का विस्तार:
31 जुलाई 2026 तक जैव-ऊर्जा क्षमता 11.75 गीगावॉट है। सीबीजी पारिस्थितिकी तंत्र का भी विस्तार हुआ है, 13 अगस्त 2026 तक 1,929 सीबीजी/बायो-सीएनजी संयंत्र पंजीकृत हैं। इनमें से 217 चालू हो चुके हैं और 357 निर्माणाधीन हैं।
बायोमास सह-उत्पादन: 31 जुलाई 2026 तक 9821.32 मेगावाट बगास-आधारित और 1048.84 मेगावाट गैर- बगास क्षमता।
अपशिष्ट-से-ऊर्जा: 31 जुलाई 2026 तक, ग्रिड से जुड़ी अपशिष्ट-से-ऊर्जा क्षमता 324.24 मेगावाट थी। ऑफ-ग्रिड संयंत्रों ने अन्य 554.16 मेगावाट का योगदान दिया।



