राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की गति बढ़कर 37 किलोमीटर प्रतिदिन हुई: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

नई दिल्ली ( दस्तक डेस्क) : सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की गति वर्ष 2014 से पहले प्रतिदिन 9 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर 37 किलोमीटर प्रतिदिन हो गई है। नई दिल्ली में आज भारतीय उद्योग परिसंघ-सीआईआई के सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री गडकरी ने यह बात कही।
इस सम्मेलन का विषय – भारत के भविष्य के राजमार्ग: स्मार्ट, सुरक्षित और टिकाऊ था। प्रधानमंत्री के भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए गडकरी ने कहा कि इसे हासिल करने में बुनियादी ढांचे का विकास महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि देश में माल ढुलाई की लागत घटकर सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 9 प्रतिशत पर आ गई है, जो पहले 16 प्रतिशत थी।
गडकरी ने कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास के बिना उद्योगों का विस्तार संभव नहीं है। इससे व्यापार और कारोबार में पूंजी निवेश भी प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास से पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। बेहतर सड़क संपर्क से पर्यटन में तीन गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि पर्यटन में 49 प्रतिशत पूंजी निवेश से रोजगार के अनेक अवसर पैदा होने की संभावना है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उल्लेख करते हुए गडकरी ने कहा कि इससे यात्रा का समय सात घंटे से घटकर दो घंटे रह गया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली से हरिद्वार के बीच एक अन्य राजमार्ग का निर्माण भी कुछ महीनों में पूरा हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि नई सड़क परियोजनाओं से कई शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हुआ है। दिल्ली से मेरठ पहुंचने में अब साढ़े तीन घंटे के बजाय 40 से 50 मिनट लगते हैं। दिल्ली से जयपुर की यात्रा में पांच घंटे के बजाय दो घंटे लगते हैं। बेंगलुरु से चेन्नई पहुंचने में चार घंटे के बजाय दो घंटे और मैसूर से बेंगलुरु पहुंचने में साढ़े तीन घंटे के बजाय एक घंटा लगता है। गडकरी ने कहा कि देशभर में सुरंगों, सड़कों और पुलों के तेजी से निर्माण तथा बेहतर सड़क संपर्क से व्यापार, वाणिज्य और पर्यटन को बढ़ावा मिला है। उन्होंने बताया कि देश में 36 एक्सप्रेसवे हैं। दिल्ली के आसपास लगभग एक लाख 60 हजार करोड़ रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण भी पूरा किया जा चुका है।
गडकरी ने बताया कि वर्ष 2002 से 2014 के दौरान देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 91 हजार 287 किलोमीटर थी, जो वर्ष 2014 से 2026 के दौरान बढ़कर एक लाख 46 हजार 572 किलोमीटर हो गई। उन्होंने कहा कि चार लेन वाले राजमार्गों की लंबाई वर्ष 2004 से 2014 के दौरान 18 हजार 278 किलोमीटर थी, जो वर्ष 2014 से 2026 के दौरान बढ़कर 49 हजार 160 किलोमीटर हो गई है। इसी अवधि में हाई-स्पीड कॉरिडोर की लंबाई 557 किलोमीटर से बढ़कर छह हजार 788 किलोमीटर हो गई, इसमें 12 गुना वृद्धि हुई है।


