मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में ‘संकल्प’ अभियान के तहत मानवाधिकार एवं लैंगिक संवेदनशीलता पर व्याख्यान
सुरक्षित परिसर, समानता और सम्मान का संदेश; 110 विद्यार्थियों एवं 6 संकाय सदस्यों ने की सहभागिता
मेरठ। खेल केवल मैदान में जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, सम्मान, समानता और मानवीय मूल्यों को जीवन में उतारने का सशक्त आधार भी है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, मेरठ में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा पोषित ‘संकल्प’ अभियान के अंतर्गत मानवाधिकार, रैगिंग की रोकथाम, लैंगिक भेदभाव, यौन हिंसा तथा संवेदनशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर एक विशेष अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया।
नमो फाउंडेशन की अधिवक्ता रहीं मुख्य वक्ता
कुलपति मेजर जनरल दीप अहलावत, वीएसएम (सेवानिवृत्त) के निर्देशन में आयोजित यह कार्यक्रम स्मार्ट क्लास, पोस्ट हार्वेस्ट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में नई दिल्ली स्थित नमो फाउंडेशन की अधिवक्ता सोनाक्षी राधिका मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने सहभागिता की।
परस्पर सम्मान के महत्व से परिचित कराया
मुख्य वक्ता अधिवक्ता सोनाक्षी राधिका ने अपने व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को मानवाधिकारों के वास्तविक अर्थ, प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, समानता के अधिकार और परस्पर सम्मान के महत्व से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि एक स्वस्थ समाज की पहचान केवल उसकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि इस बात से भी होती है कि वहाँ प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों, स्वतंत्रता और सम्मान की कितनी रक्षा की जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के साथ-साथ दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने तथा जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया।
प्रतिकूल प्रभावों के प्रति जागरूक किया
रैगिंग के विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने इसके विभिन्न स्वरूपों तथा विद्यार्थियों के मानसिक, भावनात्मक एवं शैक्षणिक जीवन पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने समझाया कि किसी भी विद्यार्थी को अपमानित करना, भयभीत करना अथवा उसकी गरिमा को ठेस पहुँचाना स्वस्थ शैक्षणिक संस्कृति के विपरीत है। उन्होंने रैगिंग की रोकथाम में जागरूकता, अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
जिम्मेदार व्यवहार की आवश्यकता को रेखांकित किया
लैंगिक भेदभाव एवं यौन हिंसा जैसे गंभीर विषयों पर मुख्य वक्ता ने संवेदनशीलता और जिम्मेदार व्यवहार की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, व्यक्तिगत सीमाओं और अधिकारों का सम्मान करने तथा किसी भी प्रकार के उत्पीड़न, भेदभाव या हिंसक व्यवहार के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समानता केवल एक विचार नहीं, बल्कि ऐसा व्यवहार है जिसे दैनिक जीवन में अपनाना आवश्यक है। एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण तभी विकसित हो सकता है, जब प्रत्येक व्यक्ति दूसरों के प्रति संवेदनशीलता, सहानुभूति और सम्मान का भाव रखे।
प्रेरित करने वाली एक सार्थक पहल है
व्याख्यान का महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना या खेल के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना भी है जो अनुशासित होने के साथ संवेदनशील, जागरूक और सामाजिक रूप से उत्तरदायी हो। इस दृष्टि से ‘संकल्प’ अभियान विद्यार्थियों को अधिकारों, कर्तव्यों और मानवीय मूल्यों के बीच संबंध समझने तथा अपने व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करने वाली एक सार्थक पहल है।
सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए
विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल दीप अहलावत, वीएसएम (सेवानिवृत्त) ने अपने सशक्त संदेश में इस बात पर जोर दिया कि खेल एवं शिक्षा में उत्कृष्टता के साथ मानवीय गरिमा, समानता, अनुशासन और पारस्परिक सम्मान को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को रैगिंग, लैंगिक भेदभाव एवं किसी भी प्रकार की हिंसा के प्रति सजग रहने तथा सुरक्षित, समावेशी और सम्मानजनक परिसर के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हों
उन्होंने इस भावना को रेखांकित किया कि विश्वविद्यालय की वास्तविक उपलब्धि केवल मैदान और अकादमिक क्षेत्र में सफलता तक सीमित नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार, संवेदनशील और चरित्रवान युवाओं के निर्माण में भी निहित है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हों। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुनील कुमार झा ने संस्थागत अनुशासन, पारस्परिक सम्मान और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण के महत्व को रेखांकित किया।



