
नई दिल्ली: दीपावली और धनतेरस से पहले एक नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन खरीदारी के लिए बनने वाला मुहूर्त अक्षय तृतीया की तरह बेहद शुभ माना जाता है। रवि पुष्य नक्षत्र का समय एक नवंबर की सुबह 10:37 बजे से शुरू होकर दो नवंबर की सुबह 9:04 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि इस दौरान सोना-चांदी, मकान, जमीन, वाहन और अन्य जरूरी वस्तुओं की खरीदारी करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। यह मुहूर्त उन लोगों के लिए भी खास है, जो शादी या किसी अन्य मांगलिक आयोजन के लिए खरीदारी की योजना बना रहे हैं।
रवि पुष्य नक्षत्र में खरीदारी का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य प्रो. बिहारी लाल शर्मा के मुताबिक, रवि पुष्य नक्षत्र को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। अक्षय तृतीया और भटली नवमी भी इसी तरह के शुभ अवसरों में शामिल हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सोना-चांदी, घर, जमीन और वाहन खरीदना शुभ होता है। माना जाता है कि रवि पुष्य नक्षत्र में की गई खरीदारी स्थायी समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक होती है।
घर की सजावट और नए कपड़े खरीदने के लिए भी शुभ दिन
ज्योतिषाचार्य प्रो. सुभाष पांडेय के अनुसार, एक नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र घर की साज-सज्जा से जुड़ी वस्तुओं और नए कपड़ों की खरीदारी के लिए उत्तम रहेगा। मान्यता है कि इस शुभ समय में की गई खरीदारी से घर में समृद्धि आती है और कार्यों में स्थिरता बनी रहती है।
हालांकि, आभूषणों की खरीदारी के लिए चार नवंबर को शुभ मुहूर्त बताया गया है। वहीं, छह नवंबर को धनतेरस के अवसर पर सोना-चांदी और पीतल के बर्तन खरीदने के लिए बेहतर समय रहेगा।
अशुभ समय में खरीदारी से बचने की मान्यता
प्रो. सुभाष पांडेय के अनुसार, ज्योतिष शास्त्र में शरद ऋतु और ठंड के मौसम में खरीदारी को शुभ माना जाता है। यह अवधि 21 अक्टूबर के बाद शुरू हो चुकी है, जो दीपावली से लेकर बनारस में मनाई जाने वाली देव दीपावली तक जारी रहेगी।
ज्योतिषीय मान्यताओं में किसी भी कार्य के लिए शुभ मुहूर्त तय करते समय तिथि, वार, नक्षत्र और योग को ध्यान में रखा जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों की तरह ही भौतिक वस्तुओं की खरीदारी में भी शुभ समय का महत्व माना गया है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में खरीदी गई वस्तुओं का स्थायित्व बढ़ता है, जबकि अशुभ समय में खरीदारी को नुकसान से जोड़कर देखा जाता है।
रवि पुष्य योग और अन्य शुभ मुहूर्त का समय
एक नवंबर को रवि पुष्य योग सुबह 10:37 बजे से शुरू होकर दो नवंबर की सुबह 9:04 बजे तक रहेगा। इस दौरान अन्य शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं।
- सर्वार्थ सिद्धि योग: एक नवंबर सुबह 6:33 बजे से दो नवंबर सुबह 4:30 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: एक नवंबर दिन में 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: एक नवंबर शाम 5:36 बजे से 6:02 बजे तक
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रवि पुष्य नक्षत्र पर बृहस्पति, शनि और चंद्रमा का प्रभाव माना जाता है। इसी वजह से इस नक्षत्र को खरीदारी और शुभ कार्यों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है।



