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धनतेरस पर शुक्र का खास संयोग, सुबह से रात तक खरीदारी के लिए जानें तीन शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली: कार्तिक महीने में मनाया जाने वाला धनतेरस का पर्व इस बार खास ज्योतिषीय संयोगों के कारण चर्चा में है। वर्ष 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस पर विधि-विधान से पूजा और शुभ समय में खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और आरोग्य बना रहता है।

इस बार धनतेरस शुक्रवार को पड़ रही है। इसके साथ ही ज्योतिषीय गणना के अनुसार शुक्र अपनी स्वराशि तुला में रहेंगे, जिससे मालव्य राजयोग बनने की मान्यता है। इसी वजह से इस बार के धनतेरस पर्व को ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष बताया जा रहा है।

धनतेरस पर बन रहा मालव्य राजयोग

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को सुख, वैभव, सौंदर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक ग्रह माना जाता है। मान्यता के अनुसार, जब शुक्र अपनी स्वराशि तुला में स्थित होते हैं, तब मालव्य राजयोग का निर्माण होता है। इसे पंच महापुरुष योगों में शामिल किया गया है।

ज्योतिषीय मान्यताओं में इस योग को सुख-सुविधाओं और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि शुक्रवार को धनतेरस और शुक्र की विशेष स्थिति के इस संयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, ग्रहों के योग और उनसे जुड़े प्रभाव धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

खरीदारी के लिए सुबह से रात तक तीन शुभ मुहूर्त

धनतेरस पर सोना, चांदी, आभूषण, बर्तन और घर के लिए नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शुभ समय में खरीदी गई वस्तुएं सुख और समृद्धि का प्रतीक होती हैं। इस बार खरीदारी के लिए तीन प्रमुख मुहूर्त बताए गए हैं।

पहला शुभ मुहूर्त सुबह 8 बजकर 16 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसे चौघड़िया मुहूर्त बताया गया है। इस समय सोना-चांदी, बर्तन और घर की जरूरत का सामान खरीदा जा सकता है।

दूसरा शुभ समय अभिजीत मुहूर्त का है, जो सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में आभूषण, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी की जा सकती है।

तीसरा शुभ मुहूर्त शाम के प्रदोष काल में बताया गया है। यह शाम 5 बजकर 49 मिनट से रात 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इस दौरान खरीदारी के साथ भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा भी की जा सकती है।

धनतेरस पर दीपदान और पूजा का भी है महत्व

धनतेरस के दिन शाम को दीपदान करने की विशेष परंपरा है। इस अवसर पर घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। भगवान धन्वंतरि की पूजा स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए की जाती है, जबकि माता लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना धन एवं संपन्नता की कामना से की जाती है।

खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान

धनतेरस पर खरीदारी करते समय अपनी जरूरत और बजट का ध्यान रखना भी जरूरी है। सोना-चांदी या कोई महंगी वस्तु खरीदने से पहले उसकी शुद्धता और कीमत की जांच कर लें। साथ ही, शुभ मुहूर्त का समय अलग-अलग शहरों और पंचांग की गणना के अनुसार बदल सकता है। इसलिए खरीदारी और पूजा से पहले अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग में दिए गए समय की पुष्टि जरूर करें।

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