
रांची: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच में सामने आए तथ्यों के बाद अब झारखंड में भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। जांच एजेंसियों के रडार पर कई अधिकारी, कारोबारी और वे कंपनियां हैं, जिनका नाम छत्तीसगढ़ मॉडल पर लागू की गई शराब नीति और उससे जुड़े कारोबारी नेटवर्क में सामने आया है। मामले में पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे का कार्यकाल भी जांच के केंद्र में है।
सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ में चल रही जांच के दौरान जिन अधिकारियों और शराब कारोबारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं, उनका संबंध झारखंड में लागू की गई उत्पाद नीति से भी जोड़ा जा रहा है। यही वजह है कि झारखंड में दर्ज मामलों की जांच अब और तेज हो सकती है।
दो अलग-अलग मामलों में ईडी कर रही जांच
झारखंड में शराब घोटाले से जुड़े मामलों में ईडी पहले ही दो अलग-अलग प्रवर्तन केस सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज कर चुकी है। इनमें एक मामला रायपुर की आर्थिक अपराध इकाई में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है, जबकि दूसरा झारखंड में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा मई 2025 में दर्ज एफआईआर के आधार पर दर्ज किया गया था।
दोनों मामलों का संबंध उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के उस दौर से बताया जा रहा है, जब विभाग की कमान पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे के पास थी। आरोप है कि कथित तौर पर भारी कमीशन लेकर छत्तीसगढ़ से जुड़े कारोबारी समूहों और कंपनियों को झारखंड के शराब कारोबार में प्रवेश दिलाया गया।
शराब कारोबार और मैनपावर ठेकों पर उठे सवाल
जांच एजेंसियों के अनुसार शराब आपूर्ति से लेकर खुदरा दुकानों में मैनपावर उपलब्ध कराने तक कई कंपनियों को काम दिया गया था। बाद में इन कंपनियों पर वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों रुपये की हेराफेरी के आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि इन कंपनियों पर झारखंड सरकार का 450 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। इस राशि की वसूली के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास जारी हैं और मामला न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है।
छापेमारी और पूछताछ का दौर जारी
ईडी झारखंड में दर्ज दोनों मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के दौरान निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे और उनसे जुड़े अन्य लोगों के ठिकानों पर छापेमारी भी की जा चुकी है।
जांच एजेंसियां उनसे कई बार पूछताछ कर चुकी हैं। इसके अलावा फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर शराब दुकानों में मैनपावर सप्लाई का ठेका हासिल करने वाली कुछ प्लेसमेंट एजेंसियों के संचालकों से भी पूछताछ की गई है।
सूत्रों का कहना है कि ईडी लगातार दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड और गवाहों के बयान जुटा रही है ताकि पर्याप्त साक्ष्यों के साथ विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जा सके।
भुगतान को लेकर भी उठ रहे सवाल
जांच के दायरे में उन कंपनियों को किए गए भुगतान भी हैं, जिनका नाम पहले से विवादों में रहा है। आरोप है कि झारखंड में वर्ष 2022 के दौरान शराब आपूर्ति करने वाली कुछ कंपनियों को बाद में करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया, जबकि उनसे जुड़े अन्य मामलों में वित्तीय देनदारियां और विवाद पहले से मौजूद थे।
जानकारी के अनुसार यह भुगतान उस समय किया गया जब राज्य सरकार की बड़ी राशि कुछ ब्लैकलिस्टेड एजेंसियों पर बकाया थी। इसी वजह से संबंधित निर्णयों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी जांच की जा रही है।
450 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली का मामला लंबित
जिन चार प्लेसमेंट एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट किया गया था, उन पर राज्य सरकार की 450 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी बताई जा रही है। इस राशि की वसूली से जुड़ा मामला फिलहाल न्यायिक विचाराधीन है। जांच एजेंसियां अब यह भी खंगाल रही हैं कि सरकारी भुगतान, ठेका आवंटन और वित्तीय निर्णयों में नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
झारखंड में शराब घोटाले की जांच जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उससे आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासों और कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।



