संसद में आज FCRA संशोधन बिल पर अमित शाह का संबोधन संभव, 15 दिन से जारी गतिरोध खत्म कराने की चुनौती भी बड़ी

नई दिल्ली: विदेशी चंदे के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ाने और कानूनी खामियों को दूर करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार आज लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA), 2026 पेश कर सकती है। यह विधेयक मार्च में बजट सत्र के दौरान भी सदन में पेश किया गया था, लेकिन उस समय लोकसभा से पारित नहीं हो सका था। सूत्रों के अनुसार, जब यह विधेयक सदन में पेश होगा, तब गृह मंत्री अमित शाह इस पर अपना पक्ष रख सकते हैं।
इस बीच सबसे बड़ी चुनौती संसद में पिछले 15 दिनों से जारी गतिरोध को समाप्त करने की बनी हुई है। सरकार लगातार विपक्ष को सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए मनाने की कोशिश कर रही है।
राहुल गांधी ने सरकार के सामने रखीं ये शर्तें
संसद में गतिरोध खत्म कराने के प्रयासों के तहत संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। बैठक में उन्होंने मानसून सत्र के शेष समय के दौरान सदन को सुचारु रूप से चलाने के लिए विपक्ष से सहयोग मांगा।
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि गृह मंत्री अमित शाह का सदन में बयान और अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर चर्चा कराए बिना विपक्ष सरकार का सहयोग नहीं करेगा।
करीब 50 मिनट चली बैठक में कई मुद्दों पर हुई चर्चा
सूत्रों के अनुसार, संसद परिसर में राहुल गांधी के कार्यालय में हुई यह बैठक करीब 50 मिनट तक चली, जिसमें प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस के बल प्रयोग के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह का बयान आवश्यक है। इसके साथ ही अयोध्या के राम मंदिर में दान की गई राशि की कथित चोरी के मामले पर भी सदन में चर्चा की मांग की गई।
विपक्ष लगातार सदन की कार्यवाही के दौरान गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठा रहा है। पिछले 10 दिनों के भीतर किरेन रिजिजू और राहुल गांधी की यह दूसरी मुलाकात रही।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर भी हुई बातचीत
बैठक के दौरान किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण और लोकसभा-विधानसभा सीटों के परिसीमन से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर भी राहुल गांधी का पक्ष जानने की कोशिश की। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि सहयोगी दलों से चर्चा करने के बाद ही वह अपनी राय साझा करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में मानसून सत्र की अवधि बढ़ाने या विशेष सत्र बुलाने को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया।
सरकार ने विशेष सत्र की अटकलों को किया खारिज
राहुल गांधी से मुलाकात के बाद किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और गृह मंत्री अमित शाह से अलग-अलग मुलाकात कर बातचीत की जानकारी साझा की। इसके बाद संसद सत्र बढ़ाने या विशेष सत्र बुलाने की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार के पास न तो सत्र विस्तार का प्रस्ताव है और न ही विशेष सत्र बुलाने की कोई योजना।
परिसीमन को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा
लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। वर्ष 1973 में संविधान संशोधन के जरिए सीटों की संख्या पर रोक लगाई गई थी। बाद में वर्ष 2002 में 84वें संविधान संशोधन के दौरान इस विषय पर चर्चा हुई, लेकिन सहमति नहीं बनने के कारण इसे वर्ष 2026 तक के लिए टाल दिया गया।
अब यह समयसीमा समाप्त होने वाली है। ऐसे में सरकार को या तो सीटों की संख्या पर लगी रोक जारी रखने के लिए नया कानून लाना होगा या फिर इस प्रतिबंध को समाप्त करने का निर्णय लेना होगा। मौजूदा व्यवस्था में यदि प्रतिबंध जारी रहता है तो महिला आरक्षण लागू नहीं हो सकेगा, जिसे लेकर राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा तेज है।



